पैराफ़्रेज़ और सारांश

पैराफ़्रेज़िंग क्या है? हिंदी में अर्थ, भावार्थ से फ़र्क़ और उदाहरण

AdeptWrite संपादकीय टीमअपडेट 8 मिनट में पढ़ें

पैराफ़्रेज़िंग का हिंदी अर्थ है किसी और के विचार को अपने शब्दों और वाक्य-रचना में पूरे अर्थ के साथ दोबारा लिखना। उद्धरण-चिह्न नहीं लगते, पर स्रोत देना ज़रूरी है।

पैराफ़्रेज़िंग का हिंदी में क्या मतलब है?

पैराफ़्रेज़िंग का मतलब है किसी दूसरे के विचार को अपने शब्दों में, अपने ढंग से दोबारा लिखना, इस तरह कि अर्थ पूरा बना रहे। मूल पाठ जितना लंबा था, लिखा हुआ रूप लगभग उतना ही लंबा होता है। इसमें उद्धरण-चिह्न नहीं लगते, फिर भी विचार के मालिक का नाम देना होता है।

"पैराफ़्रेज़" अंग्रेज़ी शब्द है और हिंदी में इसका कोई एक तय पर्याय नहीं है। लोग अलग-अलग संदर्भ में अलग शब्द खोजते हैं। नीचे सबसे आम चार देखिए।

भावार्थ, सरलार्थ, पुनर्कथन और पैराफ़्रेज़: चारों में फ़र्क़

शब्दकहाँ चलता हैक्या करना होता है
भावार्थस्कूल, कविता और दोहे के प्रश्नपंक्तियों का भाव, यानी कवि क्या कहना चाहता है, अपनी सरल भाषा में लिखना
सरलार्थपाठ्यपुस्तक और कठिन गद्यांशकठिन भाषा या शब्दों को आसान रूप में समझाना
पुनर्कथनकहानी, भाषण, साहित्यसुनी या पढ़ी बात को फिर से अपने ढंग से कहना
पैराफ़्रेज़कॉलेज असाइनमेंट, शोध-लेखन, लेखकिसी स्रोत के विचार को अपने शब्दों में, स्रोत का नाम देकर लिखना

इनमें समानता यह है कि चारों में मूल पाठ का आशय आपके शब्दों में ढलता है। फ़र्क़ मक़सद का है। भावार्थ और सरलार्थ में परीक्षक देखता है कि आपने भाव समझा या नहीं। पैराफ़्रेज़ में पाठक यह भी देखता है कि आपने विचार का श्रेय सही व्यक्ति को दिया या नहीं।

स्कूल का भावार्थ और अकादमिक पैराफ़्रेज़ में अंतर

स्कूल में कहा जाता है: "इस दोहे का भावार्थ लिखिए।" वहाँ आप किसी कविता का आशय समझाते हैं और स्रोत देने की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि प्रश्न-पत्र में स्रोत दिया ही होता है।

कॉलेज या शोध में स्थिति बदल जाती है। जब आप अपने असाइनमेंट, लघु शोध या पीएच.डी. अध्याय में किसी विद्वान की बात अपने शब्दों में लिखते हैं, तब आपको लेखक का नाम और वर्ष देना होता है, वरना वह साहित्यिक चोरी मानी जा सकती है। इसका पूरा अर्थ साहित्यिक चोरी क्या है में समझाया गया है।

तो अंतर एक वाक्य में: भावार्थ समझ की परीक्षा है, अकादमिक पैराफ़्रेज़ समझ के साथ ईमानदारी की भी।

पाँच उदाहरण: पहले और बाद

उदाहरण 1: कबीर का दोहा (सार्वजनिक रचना)

मूल: बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

भावार्थ / पैराफ़्रेज़: कवि कहते हैं कि वे दूसरों में बुराई ढूँढ़ने निकले, पर कोई बुरा व्यक्ति नहीं मिला। जब उन्होंने अपने भीतर झाँका, तब समझ आया कि सबसे ज़्यादा कमियाँ तो उन्हीं में हैं। भाव यह है कि दूसरों को परखने से पहले अपने आपको परखना चाहिए।

यहाँ दोहे की भाषा (बोली, पुराने रूप) सरल आधुनिक हिंदी में बदली, पर आशय वही रहा।

उदाहरण 2: रहीम का दोहा

मूल: रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥

भावार्थ: रहीम कहते हैं कि प्रेम का रिश्ता नाज़ुक धागे जैसा है, इसे झटके से मत तोड़ो। टूटने पर यह फिर जुड़ता नहीं, और अगर जुड़ भी जाए तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। यानी रिश्तों में एक बार दरार आने पर पहले जैसी सहजता नहीं रहती।

उदाहरण 3: समाचार

मूल (हमारा लिखा नमूना): राज्य परिवहन निगम ने घोषणा की कि अगले महीने से शहर के भीतर चलने वाली सभी बसों में डिजिटल भुगतान की सुविधा शुरू होगी।

पैराफ़्रेज़: अगले महीने से शहर की सभी बसों में किराया डिजिटल तरीके से दिया जा सकेगा। यह घोषणा राज्य परिवहन निगम ने की है।

उदाहरण 4: असाइनमेंट का अनुच्छेद

मूल (नमूना): विद्यार्थियों की पढ़ने की आदत पर मोबाइल फ़ोन का प्रभाव दोहरा है: एक ओर वह सूचना तक पहुँच आसान करता है, दूसरी ओर ध्यान भंग भी करता है।

पैराफ़्रेज़: मोबाइल फ़ोन से विद्यार्थियों को जानकारी तो आसानी से मिल जाती है, पर वही फ़ोन उनका ध्यान भी बँटा देता है। इसलिए पढ़ने की आदत पर इसका असर अच्छा और बुरा, दोनों है (लेखक का नाम, वर्ष)।

उदाहरण 5: जब पैराफ़्रेज़ बिगड़ जाए

मूल: यह दवा कुछ मरीज़ों में नींद ला सकती है।

ग़लत पैराफ़्रेज़: यह दवा मरीज़ों को सुला देती है।

यहाँ "कुछ" हटा, "सकती है" की संभावना हटी, और बात पक्की हो गई। यह पैराफ़्रेज़ नहीं, अर्थ का बदलाव है। सही रूप: कुछ रोगियों को इस दवा से नींद आ सकती है।

पैराफ़्रेज़, उद्धरण और सारांश: तुलना

पहलूउद्धरणपैराफ़्रेज़सारांश
शब्दमूल के, हू-ब-हूआपके अपनेआपके अपने
लंबाईजितनी उद्धृत की जाएमूल के लगभग बराबरमूल से काफ़ी छोटी
उद्धरण-चिह्नहाँनहींनहीं
कब चुनेंजब शब्द-विन्यास ही महत्त्वपूर्ण हो (परिभाषा, कानूनी भाषा, कवि की पंक्ति)जब विचार चाहिए, शब्द नहींजब पूरे लेख या अध्याय का निचोड़ चाहिए
स्रोत देनाज़रूरी, पृष्ठ संख्या सहितज़रूरीज़रूरी

संक्षेप में: शब्दों का महत्त्व हो तो उद्धरण, विचार का हो तो पैराफ़्रेज़, पूरे पाठ की जानकारी कम जगह में चाहिए तो सारांश। सारांश लिखने के चरण सारांश कैसे लिखें में हैं।

पैराफ़्रेज़ में स्रोत क्यों ज़रूरी है

कुछ विद्यार्थियों को लगता है कि अपने शब्दों में लिख दिया तो बात अपनी हो गई। ऐसा नहीं है। शब्द आपके हैं, पर विचार, खोज और तर्क स्रोत के हैं। इसलिए हर पैराफ़्रेज़ के साथ स्रोत लिखें। उदाहरण के लिए: (लेखक का नाम, वर्ष), या पाद-टिप्पणी में पूरा संदर्भ। स्रोत के प्रकार और पाद-टिप्पणी की जानकारी चाहिए तो मूल और द्वितीयक स्रोत और संदर्भ-सूची बनाम ग्रंथ-सूची देखें। प्रविष्टि का प्रारूप बनाने के लिए साइटेशन जनरेटर मदद करता है।

स्रोत की शैली, यानी APA, MLA, पाद-टिप्पणी या कोई और, आपके विश्वविद्यालय या शिक्षक के निर्देश से तय होती है। निर्देश न मिले तो पूछ लेना सबसे सुरक्षित है।

अच्छे पैराफ़्रेज़ की पहचान

  • अर्थ और तथ्य पूरे हैं, कुछ जुड़ा या घटा नहीं।
  • वाक्य की बनावट बदली है, केवल दो-चार शब्द नहीं।
  • भाषा स्वाभाविक है और पूरे अनुच्छेद का लहजा एक-सा है।
  • स्रोत दिया गया है।
  • पढ़ने पर वह आपकी अपनी आवाज़ में लगता है, किसी और की नक़ल में नहीं।

पैराफ़्रेज़ करने के छह व्यावहारिक तरीके, तत्सम-तद्भव चयन और वाच्य बदलने समेत, हमारे लेख हिंदी में पैराफ़्रेज़ कैसे करें में उदाहरणों सहित हैं।

AdeptWrite का पैराफ़्रेज़िंग टूल कहाँ मदद करता है

हिंदी पैराफ़्रेज़िंग टूल आपके डाले हुए पाठ को सात मोड में दोबारा लिखता है: सामान्य, औपचारिक, अनौपचारिक, अकादमिक, रचनात्मक, संक्षिप्त और विस्तृत। एक बार में 6,000 अक्षर तक डाले जा सकते हैं। यह मसौदा बनाने का साधन है। आउटपुट को मूल से मिलाना, तथ्य जाँचना और स्रोत लिखना आपको ही करना है। टूल किसी जाँच में पास होने या मौलिक सिद्ध होने की गारंटी नहीं देता।

बनाए गए पाठ को परखने के लिए ग्रामर चेकर और प्लेजरिज़्म चेकर साथ में उपयोगी हैं। प्लेजरिज़्म चेकर जैसे टूल का नतीजा एक अनुमान है, पूरा प्रमाण नहीं, इसलिए अंतिम निर्णय में अपनी समझ भी लगाएँ।

आम भ्रम

"पैराफ़्रेज़ यानी अनुवाद।" नहीं। अनुवाद में भाषा बदलती है। पैराफ़्रेज़ में भाषा वही रहती है, शब्द और ढाँचा बदलते हैं। हालाँकि अंग्रेज़ी स्रोत को हिंदी में अपने शब्दों में लिखें तब भी स्रोत देना होगा।

"पैराफ़्रेज़ छोटा होना चाहिए।" नहीं। छोटा करना सारांश है। पैराफ़्रेज़ लगभग उतना ही लंबा रहता है।

"कुछ शब्द बदलना काफ़ी है।" नहीं। यह नक़ल का हल्का रूप है, जिसे अंग्रेज़ी में "पैचराइटिंग" कहते हैं।

"भावार्थ और पैराफ़्रेज़ एक ही हैं।" काफ़ी हद तक एक जैसी प्रक्रिया हैं, पर अकादमिक लेखन में स्रोत देना पैराफ़्रेज़ की अनिवार्य शर्त है।

अभ्यास का तरीका

एक दोहा या पाठ्यपुस्तक का छोटा अनुच्छेद लीजिए। उसे ध्यान से पढ़ें, किताब बंद करें, और अपने शब्दों में तीन-चार वाक्य लिखें। फिर मूल से मिलाएँ: क्या कोई तथ्य छूटा? क्या कोई नई बात जुड़ गई? इसके बाद उसी अनुच्छेद को दो अलग लहजों में, एक औपचारिक और एक बोलचाल का, लिखकर देखें। तीन-चार बार अभ्यास करने पर आपको अपनी शैली मिलने लगेगी। दूसरों के काम की नक़ल की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।

टूल आज़माएँ

हिंदी पैराफ़्रेज़िंग टूल (Paraphrasing Tool)
वाक्यों को 7 मोड में दोबारा लिखें: सामान्य, औपचारिक, अनौपचारिक, अकादमिक, रचनात्मक, संक्षिप्त और विस्तृत।
टूल खोलें
हिंदी सारांश टूल (Summarizer)
लंबे लेख या पाठ का सार मुख्य बिंदुओं, एक अनुच्छेद या एक वाक्य में पाएँ।
टूल खोलें
हिंदी ग्रामर चेकर (व्याकरण जाँच)
हिंदी, अंग्रेज़ी और दूसरी भाषाओं में व्याकरण, वर्तनी और विराम चिह्न सुधारें — हर बदलाव हाइलाइट होता है।
टूल खोलें
हिंदी प्लेजरिज़्म चेकर (साहित्यिक चोरी जाँच)
पाठ का मिलान विकिपीडिया, विकिस्रोत और खुले शोध-स्रोतों से करें; मिलते अंश और जाँचे गए स्रोत साफ़ दिखते हैं।
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साइटेशन जनरेटर (संदर्भ सूची)
APA 7, MLA 9, Chicago, Harvard और IEEE शैली में संदर्भ और ग्रंथ-सूची की प्रविष्टि तुरंत बनाएँ।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पैराफ़्रेज़िंग का हिंदी में सही अर्थ क्या है?

पैराफ़्रेज़िंग का अर्थ है किसी दूसरे के विचार को अपने शब्दों और अपनी वाक्य-रचना में, पूरे अर्थ और लगभग बराबर लंबाई के साथ दोबारा लिखना। इसमें स्रोत का नाम देना ज़रूरी है। स्कूल में इसके सबसे करीब भावार्थ और सरलार्थ आते हैं।

भावार्थ और पैराफ़्रेज़ में क्या फ़र्क़ है?

भावार्थ स्कूल की कविता या दोहे के आशय को अपनी भाषा में समझाना है और उसमें स्रोत देने की ज़रूरत नहीं होती। पैराफ़्रेज़ अकादमिक लेखन में किसी लेखक के विचार को अपने शब्दों में लिखना है, जिसमें स्रोत का हवाला अनिवार्य है।

क्या पैराफ़्रेज़ के बाद भी स्रोत लिखना पड़ता है?

हाँ। शब्द बदल जाने पर भी विचार स्रोत का ही रहता है, इसलिए लेखक और वर्ष जैसा हवाला देना होता है। स्रोत न देने पर वह साहित्यिक चोरी मानी जा सकती है। शैली अपने विश्वविद्यालय या शिक्षक के निर्देश से पूछकर चुनें।

पैराफ़्रेज़, उद्धरण और सारांश में कौन-सा कब चुनें?

जब सटीक शब्द महत्त्वपूर्ण हों, जैसे परिभाषा या कवि की पंक्ति, तब उद्धरण लें। जब सिर्फ़ विचार चाहिए, तब पैराफ़्रेज़ करें। जब पूरे लेख या अध्याय का निचोड़ कम शब्दों में चाहिए, तब सारांश लिखें। तीनों में स्रोत देना ज़रूरी है।

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