ग्रंथ-सूची और संदर्भ-सूची में अंतर: कब कौन-सी सूची, वर्णानुक्रम का नमूना और हिंदी-अंग्रेज़ी स्रोतों का मेल
संदर्भ-सूची (References) में केवल पाठ में उद्धृत स्रोत आते हैं; ग्रंथ-सूची (Bibliography) में पढ़े गए सहायक ग्रंथ भी। APA में संदर्भ-सूची चलती है, हिंदी शोध-प्रबंधों में प्रायः ग्रंथ-सूची।
सीधा अंतर: जिनका हवाला दिया बनाम जो पढ़ा
संदर्भ-सूची (References, Reference List) में केवल वे स्रोत आते हैं जिनका आपने अपने लेख में सीधे उल्लेख किया है: उद्धरण दिया, तथ्य लिया या विचार का सार लिखा। पाठ में आए हर हवाले की पूरी प्रविष्टि सूची में होनी चाहिए, और सूची की हर प्रविष्टि का पाठ में कहीं हवाला होना चाहिए।
ग्रंथ-सूची (Bibliography) में वे सब पुस्तकें, लेख और सामग्री आती हैं जो आपके काम की पृष्ठभूमि बनीं, चाहे उनका हवाला पाठ में आया हो या नहीं। इसलिए ग्रंथ-सूची प्रायः लंबी होती है और पाठक को विषय पर आगे पढ़ने की दिशा देती है।
एक वाक्य में: संदर्भ-सूची = जो उद्धृत किया; ग्रंथ-सूची = जो उद्धृत किया और जो पढ़ा। आपके विभाग की नियमावली इन दोनों में से जो माँगे, वही अंतिम निर्देश है।
तुलना-तालिका
| आधार | संदर्भ-सूची (References) | ग्रंथ-सूची (Bibliography) |
|---|---|---|
| क्या शामिल है | केवल पाठ में उद्धृत स्रोत | उद्धृत और पृष्ठभूमि के पढ़े गए स्रोत |
| पाठ से संबंध | हर हवाले की प्रविष्टि अनिवार्य | हवाला पाठ में न भी हो तो चलता है |
| प्रचलित शैली | APA, Harvard, IEEE | Chicago की नोट-पद्धति में ग्रंथ-सूची (MLA की "Works Cited" में भी उद्धृत स्रोत ही आते हैं, यानी वह संदर्भ-सूची जैसी है) |
| हिंदी में प्रचलित नाम | संदर्भ-सूची, संदर्भ ग्रंथ | ग्रंथ-सूची, सहायक ग्रंथ-सूची |
| आम स्थान | शोध-पत्र, विज्ञान, समाजविज्ञान, शिक्षा | हिंदी, संस्कृत, इतिहास आदि मानविकी के शोध-प्रबंध |
| लंबाई | उद्धरणों के बराबर | प्रायः अधिक लंबी |
ध्यान दें: नाम हर विश्वविद्यालय में एक जैसे नहीं बरते जाते। कहीं "संदर्भ ग्रंथ-सूची" लिखा जाता है, कहीं "सहायक ग्रंथ", कहीं "परिशिष्ट" के बाद "ग्रंथ-सूची"। जो नाम आपके शोध-निर्देशक का प्रारूप माँगे, वही शीर्षक रखिए।
हिंदी शोध-प्रबंध में कौन-सी सूची
हिंदी साहित्य और भाषा-विज्ञान के पारंपरिक शोध-प्रबंधों में अध्याय के अंत में संदर्भ (पाद-टिप्पणी या अंत-टिप्पणी) और पूरे प्रबंध के अंत में ग्रंथ-सूची देने की परिपाटी रही है। ग्रंथ-सूची में अक्सर चार-पाँच उपखंड बनते हैं:
- आधार ग्रंथ (प्राथमिक स्रोत), जैसे जिस रचनाकार पर शोध है उसकी अपनी कृतियाँ
- सहायक ग्रंथ (द्वितीयक स्रोत), जैसे आलोचना, इतिहास और कोश
- पत्र-पत्रिकाएँ और शोध-पत्र
- अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं के ग्रंथ
- वेब-स्रोत (पहुँच की तिथि के साथ)
स्रोतों के प्राथमिक और द्वितीयक भेद को समझने के लिए प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत पर हमारी मार्गदर्शिका देखिए, और पाद-टिप्पणी की बनावट के लिए फ़ुटनोट और एंडनोट।
विज्ञान, समाजविज्ञान, शिक्षा और प्रबंधन के शोध-पत्रों में APA 7वें संस्करण का चलन है। वहाँ पाठ में (लेखक, वर्ष) आता है और अंत में केवल संदर्भ-सूची। यह दोनों संस्थागत नियम हैं, भाषा का नियम नहीं, इसलिए अपने विभाग का प्रारूप-पत्र ज़रूर देख लीजिए।
वर्णानुक्रम: उपनाम के हिसाब से, देवनागरी वर्णमाला में
हिंदी सूची में प्रविष्टियाँ लेखक के उपनाम (सरनेम) के अनुसार देवनागरी वर्णमाला के क्रम में लगती हैं। क्रम इस प्रकार चलता है: स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ), फिर व्यंजन (क, ख, ग, घ, ङ; च, छ, ज, झ, ञ; ट, ठ, ड, ढ, ण; त, थ, द, ध, न; प, फ, ब, भ, म; य, र, ल, व; श, ष, स, ह)। मात्राओं में क्रम सामान्यतः बिना मात्रा, फिर आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ की ओर बढ़ता है।
कुछ व्यावहारिक नियम:
- उपनाम पहले, फिर नाम: "शर्मा, मीना" (उपनाम, नाम)। जिस लेखक का एक ही नाम है (जैसे प्रेमचंद, कबीर, तुलसीदास), उसे वैसा ही रखिए, उलटा मत कीजिए।
- एक ही लेखक की कई कृतियाँ: प्रकाशन-वर्ष के क्रम में लगाइए। लेखक का नाम दोहराना है या उसकी जगह डैश (——) लिखना है, यह शैली-पुस्तिका देखकर तय कीजिए (APA में नाम हर बार दोहराया जाता है)।
- संपादित ग्रंथ: नाम के बाद (सं.) लिखिए, जैसे "वर्मा, सुनील (सं.)"।
- बिना लेखक की सामग्री (जैसे संस्था की रिपोर्ट): संस्था के नाम से क्रम लगाइए, जैसे "भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय"।
एक बात का ध्यान रहे: कंप्यूटर में ऑटो-क्रम (sort) आपके नाम को हर बार वैसा नहीं रखता जैसा विभाग चाहे, इसलिए अंतिम सूची एक बार आँख से भी जाँच लीजिए।
नमूना: हिंदी ग्रंथ-सूची (वर्णानुक्रम में)
नीचे की प्रविष्टियाँ केवल प्रारूप दिखाने के लिए गढ़ी गई काल्पनिक उदाहरण हैं। असली काम में प्रकाशक, स्थान और वर्ष अपनी पुस्तक की शीर्षक-पृष्ठ से ही लीजिए।
आधार ग्रंथ
- अग्रवाल, रमेश. नदी और नगर (उपन्यास). नई दिल्ली: उदाहरण प्रकाशन, 2012.
- गुप्ता, सुषमा. समकालीन कविता का स्वर. वाराणसी: नमूना पुस्तक भवन, 2018.
सहायक ग्रंथ
- चतुर्वेदी, अनिल (सं.). हिंदी निबंध: एक अध्ययन. प्रयागराज: उदाहरण प्रकाशन, 2015.
- मिश्र, कविता. "ग्रामीण स्त्री-लेखन में भाषा", हिंदी अनुशीलन (पत्रिका), खंड 8, अंक 2, 2020, पृ. 41-58.
- शर्मा, मीना. आधुनिक हिंदी गद्य की भाषा. जयपुर: नमूना पुस्तक भवन, 2016.
सरकारी और संस्थागत स्रोत
- भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय. भारत का संविधान. नई दिल्ली.
- केंद्रीय हिंदी निदेशालय, शिक्षा मंत्रालय. देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण. नई दिल्ली.
अंग्रेज़ी स्रोत
- McGregor, R. S. The Oxford Hindi-English Dictionary. Oxford: Oxford University Press.
वर्ष और पृष्ठ-संख्या में अंक अंतरराष्ट्रीय रूप में (2020, 41-58) रखना सबसे सुरक्षित है, क्योंकि APA जैसी शैलियाँ यही माँगती हैं। देवनागरी अंक तभी बरतिए जब आपके विभाग का प्रारूप साफ़ कहे।
APA में वही प्रविष्टि कैसे बदलती है
APA में शीर्षक "संदर्भ" (References) होता है, वर्ष कोष्ठक में लेखक के ठीक बाद आता है और पुस्तक का नाम तिरछा (italic) रखा जाता है। ऊपर की काल्पनिक पुस्तक का APA रूप: शर्मा, म. (2016). आधुनिक हिंदी गद्य की भाषा. नमूना पुस्तक भवन. पाठ में हवाला: (शर्मा, 2016, पृ. 14)। यानी शैली बदलने पर क्रम ही नहीं, पूरी प्रविष्टि बदलती है।
हिंदी और अंग्रेज़ी स्रोत एक ही सूची में कैसे मिलाएँ
शोध में हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों स्रोत आना सामान्य है। इसके तीन चलन हैं।
- दो खंड: पहले "हिंदी स्रोत" देवनागरी क्रम में, फिर "अंग्रेज़ी स्रोत" A-Z क्रम में। हिंदी विश्वविद्यालयों में यह सबसे आम और सबसे साफ़ तरीक़ा है।
- एक सूची, लिप्यंतरण से: सब स्रोतों को रोमन में लिप्यंतरित उपनाम से क्रम दें (जैसे Sharma, Meena)। हिंदी शीर्षक के साथ रोमन लिप्यंतरण और अंग्रेज़ी अनुवाद कोष्ठक में देने की परिपाटी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में है।
- एक सूची, देवनागरी क्रम: अंग्रेज़ी नाम भी देवनागरी में लिखकर क्रम में रखना। इसमें खोजना कठिन हो जाता है, इसलिए कम चलता है।
जो भी तरीक़ा चुनें, पूरी सूची में एक ही रखिए। हिंदी स्रोत को अंग्रेज़ी पत्रिका की सूची में देना हो तो मूल शीर्षक के बाद वर्गाकार कोष्ठक में अंग्रेज़ी अनुवाद लिखा जाता है। अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र में यह चलन आम है।
साइटेशन जनरेटर से तैयारी
साइटेशन जनरेटर में स्रोत का विवरण भरने पर APA 7, MLA 9, Chicago, Harvard या IEEE शैली की प्रविष्टि बनती है। यह जाँच आपके ब्राउज़र में ही होती है। सीमा यह है कि अंग्रेज़ी शैलियों के जोड़ने वाले शब्द (et al., pp.) हिंदी पाठ में अपने आप नहीं बदल सकते; ज़रूरत हो तो उन्हें "आदि" और "पृ." में आप ख़ुद बदलिए। जनरेटर की प्रविष्टि को हमेशा अपने विभाग की शैली-पुस्तिका से मिला लें।
सूची बन जाने के बाद हिंदी स्पेल चेकर से लेखकों के नाम और शीर्षक की वर्तनी की जाँच कर लीजिए। सुझाव केवल सलाह हैं: व्यक्ति-नाम की वर्तनी मूल शीर्षक-पृष्ठ से ही तय कीजिए। और उद्धरणों की मौलिकता जाँचने के लिए प्लेजरिज़्म चेकर का उपयोग किया जा सकता है, जो अनुमान देता है, प्रमाण नहीं।
आम ग़लतियाँ
- पाठ में हवाला है, सूची में नहीं (या उलटा): दोनों दिशा से मिलान कीजिए।
- दो शैलियाँ एक साथ: कुछ प्रविष्टियाँ APA में, कुछ MLA में।
- नाम का क्रम उलटा: "मीना शर्मा" को "म" पर रख देना, जबकि क्रम "श" से होना चाहिए।
- वेब-स्रोत में पहुँच की तिथि का अभाव।
जमा करने से पहले जाँच-सूची
- क्या सूची का शीर्षक विभाग के प्रारूप से मेल खाता है (संदर्भ या ग्रंथ-सूची)?
- क्या हर प्रविष्टि उपनाम के देवनागरी क्रम में है?
- क्या पाठ के हर हवाले की प्रविष्टि सूची में है?
- क्या हिंदी और अंग्रेज़ी स्रोत एक ही तरीक़े से रखे गए हैं?
- क्या सारी प्रविष्टियाँ एक ही शैली में हैं और अंक एक ही रूप में हैं?
- क्या वेब-स्रोतों में पहुँच की तिथि है?
किस बात पर हवाला देना ज़रूरी है, यह साहित्यिक चोरी से बचाव की मार्गदर्शिका में है।
टूल आज़माएँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ग्रंथ-सूची और संदर्भ-सूची में मुख्य अंतर क्या है?
संदर्भ-सूची में केवल वही स्रोत होते हैं जिनका पाठ में हवाला दिया गया। ग्रंथ-सूची में उद्धृत स्रोतों के साथ वे ग्रंथ भी होते हैं जो पृष्ठभूमि के लिए पढ़े गए। कौन-सी सूची माँगी गई है, यह आपके विश्वविद्यालय या विभाग की नियमावली से तय होता है।
क्या APA शैली में ग्रंथ-सूची लगती है?
APA में अंत में संदर्भ-सूची (References) लगती है, ग्रंथ-सूची नहीं। उसमें वही स्रोत होते हैं जिनका पाठ में (लेखक, वर्ष) के रूप में हवाला है। पृष्ठभूमि का पढ़ा हुआ सब कुछ जोड़ना हो तो संस्थान से अलग से अनुमति या प्रारूप पूछ लीजिए।
हिंदी सूची में लेखक का नाम किस क्रम में लिखें?
उपनाम पहले, फिर नाम, जैसे "शर्मा, मीना", और प्रविष्टियाँ उपनाम के देवनागरी वर्णानुक्रम में। एक ही नाम वाले लेखक, जैसे प्रेमचंद, को वैसा ही रखा जाता है। संस्था के लेखन में संस्था का नाम उपनाम का काम करता है।
हिंदी और अंग्रेज़ी स्रोत एक सूची में कैसे रखें?
सबसे आम और साफ़ तरीक़ा दो खंड बनाना है: पहले हिंदी स्रोत देवनागरी क्रम में, फिर अंग्रेज़ी स्रोत A-Z क्रम में। दूसरा तरीक़ा रोमन लिप्यंतरण से एक सूची है। जो भी चुनें, पूरी सूची में एक ही रखें।
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