हिंदी में पैराफ़्रेज़ कैसे करें: 6 तरीके, उदाहरण और जाँच-सूची
हिंदी में पैराफ़्रेज़ का मतलब है किसी और के विचार को अपने शब्दों और वाक्य-रचना में, पूरे अर्थ के साथ लिखना और स्रोत देना। केवल पर्यायवाची बदलना काफ़ी नहीं है।
हिंदी में पैराफ़्रेज़ करने का सबसे छोटा जवाब
पैराफ़्रेज़ करने के लिए पहले मूल अनुच्छेद का अर्थ समझें, फिर उसे बंद करके अपने शब्दों में लिखें, फिर मूल से मिलाकर देखें कि अर्थ नहीं बदला, और अंत में स्रोत का हवाला दें। यही चार कदम हैं। बाकी पूरा लेख इस बात पर है कि हिंदी में "अपने शब्दों में" लिखने के असली औज़ार क्या हैं।
अंग्रेज़ी के पैराफ़्रेज़िंग गाइड अक्सर "पर्यायवाची बदल दो" पर रुक जाते हैं। हिंदी में यह सलाह खतरनाक है, क्योंकि यहाँ एक ही अर्थ के लिए तीन परतों के शब्द मिलते हैं और हर परत का अपना लहजा है। शब्द बदलते समय लहजा बिगड़ गया तो वाक्य शुद्ध रहकर भी अटपटा लगेगा। पैराफ़्रेज़ की परिभाषा और स्कूल के "भावार्थ" से उसका फ़र्क़ अलग लेख पैराफ़्रेज़िंग क्या है में है। यहाँ हम तरीक़ों पर बात करेंगे।
पैराफ़्रेज़ करने से पहले की तैयारी
अच्छा पैराफ़्रेज़ लिखने से पहले की तैयारी ही आधा काम है।
- पूरा अनुच्छेद दो बार पढ़ें। पहली बार सिर्फ़ समझने के लिए, दूसरी बार यह पहचानने के लिए कि मुख्य दावा क्या है और सहायक ब्योरे क्या हैं।
- मुख्य विचार एक वाक्य में बोलकर कहें। अगर आप मूल पाठ देखे बिना उसे अपनी बोली में कह पाते हैं, तो आप तैयार हैं।
- मूल पाठ बंद करें और लिखें। देखकर लिखने पर वाक्य की बनावट अपने-आप मूल जैसी रह जाती है।
- फिर मूल से मिलाएँ। संख्याएँ, नाम, तारीख़ें, "कभी-कभी" और "हमेशा" जैसी मात्रा बताने वाले शब्द वही रहने चाहिए।
- स्रोत लिखें। लेखक, वर्ष और ज़रूरत हो तो पृष्ठ संख्या।
तरीका 1: तत्सम, तद्भव और विदेशी शब्दों में से सोच-समझकर चुनें
हिंदी की सबसे बड़ी ताक़त और सबसे बड़ा जाल यही है। एक अर्थ के लिए अक्सर तीन तरह के शब्द मिलते हैं।
| अर्थ | तत्सम (संस्कृत मूल) | तद्भव / देशज | अरबी-फ़ारसी / अंग्रेज़ी मूल |
|---|---|---|---|
| पाठशाला | विद्यालय | पाठशाला | स्कूल |
| पुस्तक | पुस्तक | — | किताब |
| जल | जल | पानी | — |
| शिक्षक | अध्यापक | गुरुजी | मास्टर, टीचर |
| परीक्षा | परीक्षा | इम्तिहान | एग्ज़ाम |
| लाभ | लाभ | फ़ायदा | — |
इनमें से किस शब्द को चुनें, यह इस पर निर्भर है कि पाठ किसके लिए है।
- शोध-पत्र, सरकारी या विश्वविद्यालयी लेखन: तत्सम शब्द स्वाभाविक लगते हैं (विद्यालय, अध्यापक, लाभ)।
- समाचार और ब्लॉग: मिली-जुली भाषा चलती है (स्कूल, परीक्षा, फ़ायदा)।
- बातचीत जैसा लेखन: तद्भव और रोज़मर्रा के शब्द (पानी, किताब, इम्तिहान)।
नियम: पूरे अनुच्छेद में एक ही परत पर टिके रहें। "विद्यालय के अध्यापकों ने इम्तिहान की तैयारी करवाई" में पहला हिस्सा तत्सम है और अंत बोलचाल का, इसलिए वाक्य बेमेल लगता है। "विद्यालय के अध्यापकों ने परीक्षा की तैयारी करवाई" सधा हुआ है।
उदाहरण (हमारा लिखा नमूना पाठ):
- मूल: स्कूल के मास्टर जी ने बच्चों को पानी बचाने की सलाह दी।
- ग़लत बदलाव: विद्यालय के गुरुजी ने नौनिहालों को जल संरक्षित करने का परामर्श प्रदान किया। (हर शब्द बदला, पर लहजा बनावटी हो गया।)
- सही बदलाव: शिक्षक ने विद्यार्थियों से कहा कि वे पानी की बर्बादी न करें।
दूसरे उदाहरण में सिर्फ़ शब्द नहीं, वाक्य का ढाँचा भी बदला है। यही अगला तरीक़ा है।
तरीका 2: वाक्य का क्रम बदलें
हिंदी में क्रिया वाक्य के अंत में आती है (कर्ता, कर्म, क्रिया), और कारक चिह्न (ने, को, से, में, पर) शब्द के बाद लगते हैं। इसलिए यहाँ शब्दों को आगे-पीछे करने की छूट काफ़ी है, बशर्ते अर्थ और ज़ोर न बिगड़े।
- मूल: सरकार ने पिछले वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में नई सड़कें बनवाईं।
- पैराफ़्रेज़: ग्रामीण क्षेत्रों में नई सड़कें सरकार ने पिछले वर्ष बनवाईं।
- एक और रूप: पिछले वर्ष सरकार की ओर से गाँवों में नई सड़कों का निर्माण कराया गया।
ध्यान रखें कि वाक्य के आरंभ में रखा गया शब्द ज़ोर पाता है। "पिछले वर्ष" को आगे रखने से समय पर ज़ोर आता है, "सड़कें" को आगे रखने से वस्तु पर। अगर मूल लेखक का ज़ोर किसी और बात पर था, तो उसे न बदलें।
तरीका 3: कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य (और उलटा)
हिंदी में तीन वाच्य होते हैं: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य। पैराफ़्रेज़ में सबसे ज़्यादा काम कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य की अदला-बदली आती है। विस्तार से नियम वाच्य के भेद वाले लेख में हैं। यहाँ उतना ही देखें जितना पैराफ़्रेज़ के लिए ज़रूरी है।
- कर्तृवाच्य: समिति ने रिपोर्ट जारी की।
- कर्मवाच्य: समिति द्वारा रिपोर्ट जारी की गई।
कर्मवाच्य बनाते समय क्रिया का रूप बदलता है: सहायक क्रिया "जाना" जुड़ती है और क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुसार चलती है (रिपोर्ट जारी की गई, पुस्तकें जारी की गईं)। यहाँ ग़लती आम है।
सावधानी:
- कर्मवाच्य सरकारी, वैज्ञानिक और रिपोर्ट-शैली में स्वाभाविक है, पर कथा और बातचीत में भारी लगता है।
- कर्ता कौन है, यह जानकारी हटाकर वाक्य न छोटा करें, खासकर तब जब आपको स्रोत का दावा बताना है। "रिपोर्ट जारी की गई" में यह पता नहीं चलता कि किसने जारी की।
- जहाँ कर्तृवाच्य सीधा है, वहाँ बिना वजह कर्मवाच्य न बनाएँ। अनुवाद-जैसी हिंदी का एक बड़ा लक्षण यही है।
तरीका 4: लंबे, संस्कृतनिष्ठ वाक्य को तोड़ें
पुराने पाठ्यक्रम, सरकारी अधिसूचनाओं और आलोचना की किताबों में बहुत लंबे वाक्य मिलते हैं। उन्हें तोड़ना पैराफ़्रेज़ का सबसे असरदार तरीक़ा है, क्योंकि इससे ढाँचा पूरी तरह बदल जाता है।
- मूल (नमूना): विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करने के निमित्त विद्यालय प्रशासन द्वारा, जो पुस्तकालय की सुविधाओं के विस्तार में संलग्न है, अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।
- पैराफ़्रेज़: विद्यालय प्रशासन पुस्तकालय की सुविधाएँ बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य है कि विद्यार्थियों में पढ़ने की रुचि जगे। इसके लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं।
तीन छोटे वाक्य बने, पर दावा वही है। तोड़ते समय जोड़ने वाले शब्दों का ध्यान रखें: "इसलिए", "इसके लिए", "इसका उद्देश्य है" जैसे पद तर्क की कड़ी बनाए रखते हैं। छोटे वाक्य बनाकर तर्क की कड़ी छोड़ देने से पाठ टूटा-टूटा लगता है।
तरीका 5: उपवाक्यों को जोड़ें या खोलें
इसका उलटा भी काम करता है। अगर मूल में दो छोटे वाक्य हैं तो उन्हें "जो", "कि", "क्योंकि", "जबकि" से जोड़कर एक वाक्य बनाएँ।
- मूल: परियोजना देर से शुरू हुई। इसलिए रिपोर्ट भी देर से जमा हुई।
- पैराफ़्रेज़: परियोजना देर से शुरू होने के कारण रिपोर्ट भी देर से जमा हुई।
यहाँ "के कारण" से कारण-परिणाम का संबंध बना रहा। "क्योंकि" वाला रूप भी चलेगा: रिपोर्ट देर से जमा हुई क्योंकि परियोजना देर से शुरू हुई थी।
तरीका 6: भाव वही, अभिव्यक्ति का प्रकार नया
संज्ञा-रूप को क्रिया-रूप में बदलना या उलटा करना भी ढाँचा बदलता है।
- संज्ञा-रूप: बिजली की खपत में कमी करना हमारा लक्ष्य है।
- क्रिया-रूप: हम चाहते हैं कि बिजली कम खर्च हो।
हिंदी में मुहावरेदार प्रयोग पर विशेष ध्यान दें। "दाँतों तले उँगली दबाना" जैसे मुहावरे का शाब्दिक पर्याय बनाने से अर्थ नष्ट हो जाता है। मुहावरा हो तो उसका अर्थ सीधे लिखें ("बहुत हैरान हुए") या मुहावरा वैसा ही रहने दें।
दो पूरे उदाहरण: पाठ्य-अनुच्छेद और समाचार
बी.ए. असाइनमेंट का अनुच्छेद
मूल (हमारा लिखा नमूना): भारतीय समाज में संयुक्त परिवार की परंपरा धीरे-धीरे कमज़ोर हुई है। नगरों में रोज़गार के अवसरों की तलाश में लोग अपने गाँव छोड़कर छोटे परिवारों में रहने लगे हैं, जिससे बुज़ुर्गों की देखभाल की चुनौती बढ़ी है।
पैराफ़्रेज़: रोज़गार की खोज में लोग गाँव से शहर आ रहे हैं और छोटे परिवार बसा रहे हैं। इस कारण संयुक्त परिवार की परंपरा ढीली पड़ी है और बुज़ुर्गों की देखभाल पहले से कठिन हो गई है (लेखक का नाम, वर्ष, पृ. संख्या)।
क्या बदला: कारण को वाक्य के आरंभ में रखा, लंबा वाक्य दो में टूटा, "नगर" की जगह "शहर" आया (लहजा असाइनमेंट के लिए ठीक है), और स्रोत जुड़ा। क्या नहीं बदला: दावा, यानी संयुक्त परिवार का कमज़ोर होना और देखभाल की चुनौती।
समाचार रिपोर्ट
मूल (नमूना): नगर निगम ने घोषणा की कि अगले सोमवार से शहर के तीन प्रमुख बाज़ारों में प्लास्टिक की थैलियों पर रोक लग जाएगी।
पैराफ़्रेज़: अगले सोमवार से शहर के तीन मुख्य बाज़ारों में प्लास्टिक की थैलियाँ नहीं चलेंगी। यह घोषणा नगर निगम ने की है।
समाचार में कौन, क्या और कब नहीं बदलना चाहिए। "तीन" को "कुछ" या "कई" कर देना पैराफ़्रेज़ नहीं, तथ्य की गड़बड़ी है।
AdeptWrite के 7 मोड एक अनुच्छेद पर
हिंदी पैराफ़्रेज़िंग टूल पाठ को सात मोड में दोबारा लिखता है: सामान्य, औपचारिक, अनौपचारिक, अकादमिक, रचनात्मक, संक्षिप्त और विस्तृत। एक बार में 6,000 अक्षर तक का पाठ डाला जा सकता है। नीचे एक ही वाक्य पर हर मोड का मक़सद दिखाया है। ये हमारे लिखे उदाहरण हैं जो मोड की दिशा समझाने के लिए हैं। टूल का असली आउटपुट हर बार थोड़ा अलग हो सकता है।
मूल वाक्य: ऑनलाइन कक्षाओं से दूर-दराज़ के विद्यार्थियों को पढ़ने का मौक़ा मिला, पर कमज़ोर इंटरनेट से कई बच्चे पीछे रह गए।
| मोड | मक़सद | नमूना रूप |
|---|---|---|
| सामान्य | साफ़, संतुलित भाषा | ऑनलाइन कक्षाओं ने दूर के विद्यार्थियों को पढ़ाई का अवसर दिया, लेकिन धीमे इंटरनेट के कारण कई बच्चे पिछड़ गए। |
| औपचारिक | पत्र और कार्यालय के लिए | ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर प्राप्त हुआ, किंतु अपर्याप्त इंटरनेट सुविधा के कारण अनेक विद्यार्थी पिछड़ गए। |
| अनौपचारिक | बातचीत जैसा | ऑनलाइन क्लास से दूर रहने वाले बच्चों को पढ़ने का मौक़ा तो मिला, पर नेट कमज़ोर होने से बहुत-से बच्चे पीछे छूट गए। |
| अकादमिक | असाइनमेंट और शोध के लिए | ऑनलाइन कक्षाओं ने दूरस्थ विद्यार्थियों की शिक्षा तक पहुँच बढ़ाई, परंतु इंटरनेट की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण अनेक विद्यार्थी इस लाभ से वंचित रहे। |
| रचनात्मक | अधिक जीवंत भाषा | पर्दे पर खुलती कक्षाओं ने दूर गाँवों तक ज्ञान पहुँचाया, पर कमज़ोर नेटवर्क की दीवार के पीछे कई बच्चे अनसुने रह गए। |
| संक्षिप्त | कम शब्दों में | ऑनलाइन कक्षाओं से मौक़ा बढ़ा, पर कमज़ोर इंटरनेट से कई बच्चे पिछड़े। |
| विस्तृत | थोड़ा खोलकर | ऑनलाइन कक्षाओं की वजह से दूर-दराज़ के विद्यार्थी भी पढ़ाई से जुड़ सके, लेकिन जिन इलाक़ों में इंटरनेट कमज़ोर था, वहाँ कई बच्चे इस सुविधा का पूरा लाभ नहीं उठा पाए। |
ध्यान दें कि "कई" की जगह "अनेक" आया है और मात्रा वही रही। "कुछ" लिख देने से मात्रा घट जाती, इसलिए मात्रा-बोधक शब्द हर बार मिलाने चाहिए। मोड चुनने के बाद भी आउटपुट को मूल से मिलाना आपकी ज़िम्मेदारी है।
पैराफ़्रेज़ को सही ढंग से उद्धृत कैसे करें
पैराफ़्रेज़ में उद्धरण-चिह्न नहीं लगते, पर स्रोत देना ज़रूरी है। अपने विश्वविद्यालय या विभाग की बताई शैली देखें। हिंदी में भी APA जैसी शैली चलती है: लेखक का नाम और वर्ष, जैसे (लेखक का नाम, वर्ष)। संदर्भ-सूची की प्रविष्टि बनाने के लिए साइटेशन जनरेटर उपयोग करें, और जाँचें कि आपके विभाग के नियम से शैली मेल खाती है या नहीं। विचार किसी और का है तो पैराफ़्रेज़ के बाद भी वह उसी का रहता है। चोरी से बचने के पूरे उपाय साहित्यिक चोरी से कैसे बचें में हैं।
पैराफ़्रेज़ जाँचने की सूची
- क्या मूल का हर तथ्य, संख्या, नाम और तारीख़ वैसे ही है?
- क्या "कभी-कभी", "अक्सर", "हमेशा", "कुछ", "सभी" जैसे शब्द उसी मात्रा के हैं?
- क्या वाक्य का ढाँचा बदला है, केवल शब्द नहीं?
- क्या पूरे अनुच्छेद में एक ही भाषा-परत (तत्सम, मिली-जुली, बोलचाल) है?
- क्या कर्ता का नाम ग़ायब तो नहीं हो गया?
- क्या मुहावरे का अर्थ सुरक्षित है?
- क्या वर्तनी शुद्ध है? हिंदी स्पेल चेकर और ग्रामर चेकर से जाँच लें।
- क्या स्रोत लिखा है?
- क्या आपके विभाग या शिक्षक की मौलिकता की सीमा का ध्यान रखा गया है?
आम ग़लतियाँ
- सिर्फ़ पर्याय बदलना। "विद्यालय" को "स्कूल" और "बच्चे" को "विद्यार्थी" कर देने से वाक्य वही रहता है, इसलिए मिलान करने वाले टूल उसे पकड़ सकते हैं।
- पर्याय चुनने में लहजा बिगाड़ना। हर शब्द को कठिन तत्सम में बदलने से भाषा कृत्रिम बनती है।
- अर्थ का दावा बदल देना। "संभवतः" हटाकर बात पक्की कर देना सबसे गंभीर ग़लती है।
- वाच्य बदलते समय क्रिया का रूप ग़लत रखना। "पुस्तकें जारी की गई" की जगह "पुस्तकें जारी की गईं" होना चाहिए।
- स्रोत न देना। अपने शब्दों में लिखने से स्रोत की ज़रूरत नहीं मिटती।
- AI टूल का आउटपुट बिना पढ़े चिपका देना। टूल मसौदा देता है, ज़िम्मेदारी आपकी है।
टूल का इस्तेमाल कैसे करें
- अपना अनुच्छेद हिंदी पैराफ़्रेज़िंग टूल में डालें (एक बार में 6,000 अक्षर तक)।
- अपने मक़सद के हिसाब से मोड चुनें: असाइनमेंट के लिए अकादमिक, पत्र के लिए औपचारिक।
- आउटपुट को ऊपर की जाँच-सूची से परखें और ज़रूरत हो तो अपने शब्द जोड़ें।
- वाक्य अटपटा लगे तो उसे वाक्य सुधारक में दें, और लहजा बदलना हो तो टोन चेंजर आज़माएँ।
- लंबा अनुच्छेद हो तो पहले सारांश टूल से मुख्य बिंदु निकालकर देखें कि आपको कौन-सा हिस्सा पैराफ़्रेज़ करना है।
- अंत में स्रोत जोड़ें और अपनी प्रति मौलिकता के लिए हिंदी प्लेजरिज़्म चेकर में जाँच लें।
टूल एक मसौदा बनाता है, पूरा काम नहीं करता। पैराफ़्रेज़ किया हुआ पाठ भी आपका तभी माना जाएगा जब आपने उसे समझकर जाँचा हो।
अभ्यास के लिए तीन वाक्य
अभ्यास के लिए इन तीन वाक्यों को ऊपर के अलग-अलग तरीकों से बदलकर देखें। पहले हर वाक्य का मुख्य दावा एक पंक्ति में लिखें, फिर बदलाव करें।
- कई स्कूलों में पुस्तकालय का समय बढ़ाने से विद्यार्थियों की पढ़ने की आदत सुधरी है।
- मौसम विभाग ने चेतावनी दी कि अगले दो दिनों में पहाड़ी इलाक़ों में भारी बारिश हो सकती है।
- आज के समय में सोशल मीडिया युवाओं की सोच को गहराई से प्रभावित करता है।
दूसरे वाक्य में "हो सकती है" की संभावना को बनाए रखें, क्योंकि उसे "होगी" करना अर्थ बदलना है।
टूल आज़माएँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिंदी में पैराफ़्रेज़ करने का सबसे आसान तरीका क्या है?
पहले अनुच्छेद का मुख्य दावा समझें, मूल पाठ बंद करके उसे अपने शब्दों और नई वाक्य-रचना में लिखें, फिर मूल से मिलाकर तथ्य जाँचें और स्रोत जोड़ें। सिर्फ़ पर्यायवाची बदलना पर्याप्त नहीं है, वाक्य का क्रम, वाच्य या लंबाई भी बदलें।
क्या सिर्फ़ पर्यायवाची बदलने से पैराफ़्रेज़ हो जाता है?
नहीं। इससे वाक्य की बनावट वही रहती है और मिलान करने वाले टूल उसे पकड़ सकते हैं। साथ ही हिंदी में तत्सम, तद्भव और विदेशी शब्दों का लहजा अलग होता है, इसलिए बिना सोचे शब्द बदलने से भाषा अटपटी हो जाती है।
क्या पैराफ़्रेज़ किए गए पाठ में भी स्रोत देना ज़रूरी है?
हाँ। पैराफ़्रेज़ में उद्धरण-चिह्न नहीं लगते, पर विचार किसी और का होता है, इसलिए लेखक और वर्ष जैसा स्रोत देना ज़रूरी है। स्रोत की शैली आपके विभाग, विश्वविद्यालय या शिक्षक के नियम से तय होती है।
क्या AdeptWrite का पैराफ़्रेज़र किसी भी पाठ को सुरक्षित बना देता है?
नहीं। यह सात मोड में दोबारा लिखा हुआ मसौदा देता है, जिसे आपको अर्थ और तथ्य के लिए मूल से मिलाना है। यह मौलिकता या किसी जाँच में पास होने की गारंटी नहीं देता, और स्रोत देना फिर भी आपकी ज़िम्मेदारी रहती है।
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