लहजा क्यों मायने रखता है?
हिंदी में लहजा सिर्फ़ शब्दों का नहीं, संबोधन और क्रिया-रूपों का भी होता है। "तुम आ जाओ", "आप आ जाइए" और "आप पधारने की कृपा करें" तीनों एक ही बात कहते हैं, पर तीन अलग रिश्तों में। गलत लहजा पत्र को रूखा या ज़रूरत से ज़्यादा बनावटी बना देता है।
तीन मोड, तीन स्थितियाँ
| मोड | कहाँ इस्तेमाल करें | कैसा रूप मिलता है |
|---|---|---|
| औपचारिक | प्रार्थना पत्र, आवेदन, सरकारी पत्राचार | मानक शब्दावली, "आदरणीय", "कृपया", "सधन्यवाद" |
| कार्यालयी | दफ़्तर के ईमेल, क्लाइंट संदेश | विनम्र पर सीधे, छोटे वाक्य |
| अनौपचारिक | चैट, दोस्तों-परिवार को संदेश | सहज बोलचाल, कम भारी शब्द |
उपयोग का तरीका
- पहले अपनी बात बिना सजावट के लिख लें।
- मोड उस व्यक्ति के हिसाब से चुनें जिसे लिख रहे हैं, विषय के हिसाब से नहीं।
- परिणाम में अभिवादन और समापन देखें। पत्र लेखन का प्रारूप जानने के लिए गाइड पत्र लेखन देखें।
- पूरा पत्र या ईमेल शुरू से बनाना हो तो पत्र और ईमेल लेखक इस्तेमाल करें।
सीमाएँ
पाठ एक बार में 6,000 अक्षर तक का हो। टूल लहजा बदलता है, तथ्य जाँचता नहीं। मुहावरे, लोकोक्तियाँ और क्षेत्रीय बोलियों के रूप कभी-कभी सामान्य शब्दों में बदल जाते हैं। संवेदनशील पत्र, जैसे कानूनी नोटिस, में परिणाम भेजने से पहले ध्यान से पढ़ें। सेवा न पहुँचे तो संपादक त्रुटि संदेश और दोबारा कोशिश का बटन दिखाता है।