रूपरेखा क्यों बनाएँ?
रूपरेखा लिखने से पहले का नक्शा है। वह तय करती है कि कौन-सी बात पहले आएगी, कौन-सी बाद में, और हर खंड में क्या कहना है। हिंदी निबंध की परंपरा में भी भूमिका, मुख्य भाग और उपसंहार की यही बुनियाद है। इससे भटकाव घटता है।
किस मोड में क्या मिलता है?
| मोड | क्या मिलता है | किसके लिए |
|---|---|---|
| लेख | कार्यशील शीर्षक, भूमिका, 5 से 8 मुख्य खंड (हर में 2 से 4 उप-बिंदु), उपसंहार, 3 FAQ विचार | ब्लॉग, समाचार-लेख, कंटेंट |
| निबंध | एक थीसिस-वाक्य, भूमिका, 3 से 5 मुख्य भाग (दावा, तर्क या प्रमाण, उदाहरण का विचार), उपसंहार | स्कूल-कॉलेज के निबंध |
| शोध प्रबंध | परिचय से निष्कर्ष तक के अध्याय, हर में 3 से 6 उप-खंड | लघु शोध, डिज़र्टेशन, थीसिस |
| प्रस्तुति | 8 से 15 स्लाइड; हर में शीर्षक, मुख्य संदेश, 2 से 4 बिंदु | सेमिनार, पिच, दफ़्तरी प्रस्तुति |
शोध वाले बिंदुओं का क्या होता है
टूल सिर्फ़ वही तथ्य और कोण इस्तेमाल करता है जो आपने विषय या नोट्स में दिए। जहाँ आँकड़े, उदाहरण या स्रोत चाहिए, वहाँ वह उप-बिंदु में "शोध करें" जैसा संकेत छोड़ता है। ऐसे हर बिंदु के लिए किसी प्रामाणिक स्रोत से जानकारी खुद जुटाएँ, और स्रोतों की सूची साइटेशन जनरेटर से बनाएँ।
रूपरेखा के बाद क्या करें
- खंडों को अपनी ज़रूरत के हिसाब से जोड़ें या हटाएँ।
- हर खंड के लिए अनुच्छेद जनरेटर या निबंध लेखक से मसौदा बनाएँ, या खुद लिखें।
- शोध प्रबंध के शीर्षक के विचार चाहिए तो शोध शीर्षक जनरेटर देखें।
सीमाएँ
एक बार में 6,000 अक्षर तक का विषय या नोट्स लिए जाते हैं। रूपरेखा एक सुझाव है, आपके विश्वविद्यालय या मार्गदर्शक के प्रारूप का विकल्प नहीं: शोध प्रबंध के अध्याय और क्रम हर संस्था में थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने विभाग के दिशानिर्देश से मिलाएँ। अस्पष्ट विषय से रूपरेखा सामान्य बनेगी; कोण जोड़ें, जैसे "ग्रामीण विद्यालयों में डिजिटल साक्षरता"।