अच्छा शीर्षक क्या करता है?
शीर्षक का काम दो हैं: पाठक को बताना कि लेख किस बारे में है, और उसे पढ़ने का कारण देना। जो शीर्षक लेख का वादा निभाता है, वही टिकता है। "आप यक़ीन नहीं करेंगे" जैसे खोखले दावे से पाठक जल्दी लौट जाता है, इसीलिए टूल भ्रामक क्लिकबेट से बचने के निर्देश पर चलता है।
दो मोड, दो शैलियाँ
| मोड | लंबाई | ढाँचे | कब चुनें |
|---|---|---|---|
| रचनात्मक | अधिकतम 12 शब्द | सवाल, संख्या, विरोधाभास, लाभ, जिज्ञासा | ब्लॉग, पत्रिका, वीडियो, सोशल पोस्ट |
| संक्षिप्त | अधिकतम 8 शब्द | सीधा लाभ या मुद्दा, बिना फ़ालतू शब्द | समाचार-शैली, मोबाइल, सूचना-लेख |
शीर्षक के सामान्य ढाँचे (हिंदी उदाहरण)
- संख्या वाला: "बोर्ड परीक्षा से पहले के 30 दिन: ऐसे बनाएँ टाइम-टेबल"
- सवाल वाला: "क्या हिंदी माध्यम से UPSC निकालना कठिन है?"
- कैसे वाला: "रिज्यूमे में कौशल कैसे लिखें"
- विरोधाभास वाला: "ज़्यादा घंटे नहीं, सही रणनीति"
टूल की दस पंक्तियों में आम तौर पर ऐसे अलग-अलग ढाँचे मिलते हैं; आप उन्हें सीधे चुन सकते हैं या दो को जोड़ सकते हैं।
बेहतर नतीजे के लिए इनपुट
सिर्फ़ विषय नहीं, पाठक और मुख्य बात भी लिखें: "माता-पिता के लिए: बच्चों का स्क्रीन-टाइम घटाने के आसान उपाय।" पूरा लेख चिपकाने पर शीर्षक लेख की असली बातों से जुड़े रहते हैं। साथ में खोज में जिस शब्द-समूह पर आप आना चाहते हैं, उसे भी लिख दें।
शीर्षक चुनने के बाद
- जाँचें कि शीर्षक लेख में दिए वादे से बड़ा दावा नहीं करता।
- खोज-परिणाम में पूरा दिखने के लिए छोटा रखें; मोबाइल पर लंबा शीर्षक कटता है। लेख का विवरण लिखने के लिए मेटा डिस्क्रिप्शन जनरेटर काम आएगा।
- वर्तनी जाँचें; हिंदी स्पेल चेकर इसमें मदद करता है।
- सोशल मंच पर साझा करना हो तो कैप्शन जनरेटर से कैप्शन भी बनाएँ।
सीमाएँ
शीर्षक AI के सुझाव हैं और टूल यह नहीं बता सकता कि कौन-सा शीर्षक खोज या सोशल मंच पर अधिक पढ़ा जाएगा। किसी विशेष क्लिक या रैंक का कोई वादा नहीं है। नाम, संख्या और दावे वाले शीर्षक में तथ्य खुद जाँचें।