हिंदी व्याकरण और वर्तनी

हिंदी वाच्य: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य की पहचान, नियम और अभ्यास

AdeptWrite संपादकीय टीमअपडेट 14 मिनट में पढ़ें

वाच्य क्रिया का वह रूप है जो बताता है कि वाक्य में प्रधानता कर्ता, कर्म या भाव में किसकी है। हिंदी में तीन वाच्य हैं: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य। नीचे पहचान, बदलने के चरण और अभ्यास हैं।

सीधा जवाब: वाच्य क्या है और कितने हैं

वाच्य क्रिया के उस रूप को कहते हैं जिससे यह पता चलता है कि वाक्य में क्रिया का लिंग-वचन किसके अनुसार चल रहा है और बात किस पर केंद्रित है। हिंदी में तीन वाच्य माने जाते हैं।

वाच्यक्रिया किसके अनुसार चलती हैउदाहरण
कर्तृवाच्यकर्ता के अनुसाररमा पत्र लिखती है।
कर्मवाच्यकर्म के अनुसाररमा से पत्र लिखा जाता है।
भाववाच्यकिसी के अनुसार नहीं; क्रिया सदा पुल्लिंग, एकवचन, अन्य पुरुषमुझसे चला नहीं जाता।

तीनों में सबसे ज़्यादा उलझन भाववाच्य में होती है, क्योंकि उसमें कर्म होता ही नहीं और कर्ता "से" के साथ आता है। इस पन्ने में तीनों के नियम, बदलने की विधि, परीक्षा-शैली अभ्यास और यह सलाह है कि लेखन में कब कौन-सा वाच्य बेहतर रहता है।

एक सावधानी: कुछ पाठ्यपुस्तकें और व्याकरण-ग्रंथ उदाहरणों और उप-भेदों में थोड़ा अलग ढंग अपनाते हैं। परीक्षा के लिए अपनी पाठ्यपुस्तक की परिभाषा और उदाहरण-शैली को प्राथमिकता दें। यहाँ वही रूप दिए गए हैं जो आम तौर पर प्रचलित हैं।

कर्तृवाच्य: कर्ता प्रधान

जब क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता के अनुसार बदलते हैं, तब वाक्य कर्तृवाच्य में होता है। हिंदी के अधिकांश रोज़मर्रा के वाक्य इसी में होते हैं।

  • लड़का खाना खाता है।
  • लड़कियाँ गीत गाती हैं।
  • मैं कल दिल्ली जाऊँगा।

ध्यान दें कि कर्ता बदलते ही क्रिया बदलती है: लड़का खाता है, लड़कियाँ गाती हैं। यह कर्तृवाच्य की सबसे सीधी पहचान है।

"ने" वाले वाक्य: एक आम भ्रम

"राम ने रोटी खाई" में क्रिया कर्म (रोटी) के अनुसार चलती है, कर्ता के अनुसार नहीं। व्याकरण-ग्रंथ इसे कर्मणि प्रयोग कहते हैं। प्रयोग और वाच्य अलग बातें हैं: यह कर्ता-प्रधान वाक्य है, कर्मवाच्य नहीं, क्योंकि इसमें कर्ता के साथ "से" या "द्वारा" नहीं लगता और कर्ता वाक्य का केंद्र बना रहता है। विद्यार्थी अक्सर "ने" देखकर इसे कर्मवाच्य लिख देते हैं। यही सबसे आम गलती है। वाच्य पहचानने के लिए कर्ता का चिह्न देखें: "ने" वाला वाक्य कर्तृवाच्य है, "से" या "द्वारा" वाला कर्मवाच्य या भाववाच्य।

कर्मवाच्य: कर्म प्रधान

जब क्रिया के लिंग और वचन कर्म के अनुसार चलते हैं और कर्ता गौण हो जाता है, तब वाक्य कर्मवाच्य में होता है। इसकी बनावट इस सूत्र पर चलती है:

कर्म + (कर्ता + से / के द्वारा) + मुख्य क्रिया का भूतकालिक कृदंत + जाना (काल के अनुसार)

कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
रमा पत्र लिखती है।रमा से पत्र लिखा जाता है।
शिक्षक ने कविता पढ़ाई।शिक्षक द्वारा कविता पढ़ाई गई।
माली पौधे सींचेगा।माली द्वारा पौधे सींचे जाएँगे।
पुलिस ने चोर को पकड़ा।पुलिस द्वारा चोर को पकड़ा गया।
कर्मचारी फ़ाइलें लाएगा।कर्मचारी द्वारा फ़ाइलें लाई जाएँगी।

"से" और "द्वारा" में चुनाव

  • द्वारा औपचारिक और लिखित भाषा में चलता है, ख़ासकर जब कर्ता कोई संस्था या व्यक्ति हो: "समिति द्वारा निर्णय लिया गया।"
  • से बोलचाल और सहज गद्य में चलता है, और सामर्थ्य या असमर्थता वाले भाव में अक्सर यही आता है: "इतना भारी सामान मुझसे उठाया नहीं जाता।"
  • कर्ता का उल्लेख ज़रूरी न हो तो उसे हटाया भी जा सकता है: "पत्र भेज दिया गया।" इस रूप में कर्ता अनुपस्थित है और बात कर्म पर ठहरती है।

जाना के साथ क्रिया-रूप

कर्मवाच्य में सहायक क्रिया जाना का रूप काल और कर्म के लिंग-वचन के अनुसार बदलता है, जबकि मुख्य क्रिया भूतकालिक कृदंत में रहती है (लिखा, पढ़ी, सींचे, लाई)।

कालपुल्लिंग एकवचनस्त्रीलिंग बहुवचन
वर्तमानपत्र लिखा जाता हैकहानियाँ लिखी जाती हैं
भूतपत्र लिखा गयाकहानियाँ लिखी गईं
भविष्यपत्र लिखा जाएगाकहानियाँ लिखी जाएँगी
आज्ञा/संभावनापत्र लिखा जाएकहानियाँ लिखी जाएँ

"लाना" जैसी क्रियाओं में भी यही नियम चलता है: "किताबें लाई गईं", "सामान लाया जाएगा"। भूतकालिक कृदंत कर्म के लिंग-वचन से मेल खाता है (लाया, लाई, लाए) और उसके बाद "जाना" काल के अनुसार आता है।

भाववाच्य: भाव (क्रिया) प्रधान

भाववाच्य में केवल अकर्मक क्रिया आती है, यानी वह क्रिया जिसका कर्म नहीं होता। इसमें प्रधानता क्रिया के भाव की होती है, इसलिए क्रिया न कर्ता के अनुसार चलती है न कर्म के अनुसार। उसका रूप हमेशा पुल्लिंग, एकवचन, अन्य पुरुष रहता है, और कर्ता "से" के साथ आता है।

भाववाच्य वाक्यकर्तृवाच्य रूप
मुझसे चला नहीं जाता।मैं चल नहीं पाता / पाती।
उससे बैठा नहीं जाता।वह बैठ नहीं पाता / पाती।
बच्चों से रात भर जागा नहीं गया।बच्चे रात भर जाग नहीं पाए।
धूप में खड़ा नहीं रहा जाता।धूप में कोई खड़ा नहीं रह पाता।
अब चलो, सोया जाए।अब चलो, हम सोएँ।

भाववाच्य की तीन पहचानें

  1. क्रिया अकर्मक है: चलना, उठना, बैठना, सोना, हँसना। कर्म की गुंजाइश नहीं।
  2. कर्ता के साथ "से" लगा है: मुझसे, उससे, तुमसे, बच्चों से।
  3. क्रिया का रूप अटल है: कर्ता कोई भी हो, क्रिया "चला जाता", "बैठा गया", "सोया जाए" ही रहती है। "मुझसे चली नहीं जाती" लिखना गलत है, क्योंकि "चलना" अकर्मक है और भाववाच्य में स्त्रीलिंग रूप नहीं बनता।

निषेध और असमर्थता का भाव

भाववाच्य का सबसे प्रचलित प्रयोग असमर्थता दिखाने में है, और वह लगभग हमेशा नकारात्मक वाक्यों में आता है: "मुझसे यह सुना नहीं जाता", "उनसे अब पढ़ा नहीं जाता", "गर्मी में बाहर निकला नहीं जाता।" सकारात्मक रूप भी बनते हैं, पर कम: "आज तो जी भरकर हँसा गया", "यहाँ चुपचाप बैठा जाए।" परीक्षा में भाववाच्य का उदाहरण माँगा जाए तो नकारात्मक वाक्य सबसे सुरक्षित चुनाव है।

वाच्य बदलने के चरण

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाने की क्रमबद्ध विधि:

चरणक्या करेंउदाहरण: "माँ खाना बनाती है"
1कर्ता, कर्म और क्रिया पहचानेंकर्ता: माँ; कर्म: खाना; क्रिया: बनाती है
2कर्म को वाक्य के आरंभ में रखेंखाना
3कर्ता के बाद "से" या "द्वारा" लगाएँमाँ से / माँ द्वारा
4मुख्य क्रिया को भूतकालिक कृदंत में बदलेंबनाया
5उसके बाद "जाना" को काल के अनुसार जोड़ेंबनाया जाता है
6कर्म के लिंग-वचन से मेल देखेंखाना (पु., ए.) → बनाया जाता है

परिणाम: "माँ से खाना बनाया जाता है।" (बोलचाल में यह थोड़ा अटपटा लगता है, इसलिए औपचारिक लेखन में "माँ द्वारा खाना बनाया जाता है" अधिक स्वाभाविक है।)

भाववाच्य से कर्तृवाच्य: "से" हटाकर कर्ता को सीधा रखें और "पाना", "सकना" जैसी सहायक क्रिया से सामर्थ्य का भाव लौटाएँ। "उससे उठा नहीं जाता" → "वह उठ नहीं पाता।" दोनों वाक्यों का भाव लगभग एक है, बस ज़ोर बदल जाता है।

एक नियम जो याद रखें: सकर्मक क्रिया से कर्मवाच्य बनता है, अकर्मक क्रिया से भाववाच्य। इसलिए वाच्य बदलने से पहले क्रिया की प्रकृति ज़रूर जाँचें।

बोर्ड-परीक्षा शैली अभ्यास (उत्तर सहित)

(क) वाच्य पहचानिए

  1. विद्यार्थियों ने निबंध लिखा।
  2. चिट्ठी डाकिए द्वारा बाँटी गई।
  3. मुझसे आज दौड़ा नहीं गया।
  4. बच्चा किताब पढ़ रहा है।
  5. वर्षा में बाहर निकला नहीं जाता।

उत्तर: 1. कर्तृवाच्य (कर्ता "ने" के साथ, "से/द्वारा" नहीं)। 2. कर्मवाच्य। 3. भाववाच्य। 4. कर्तृवाच्य। 5. भाववाच्य।

(ख) कर्मवाच्य में बदलिए

  1. किसान खेत जोतता है। → किसान द्वारा खेत जोता जाता है।
  2. अध्यापिका ने कहानी सुनाई। → अध्यापिका द्वारा कहानी सुनाई गई।
  3. हम नदी पार करेंगे। → हमारे द्वारा नदी पार की जाएगी।
  4. सरकार ने योजना लागू की। → सरकार द्वारा योजना लागू की गई।

(ग) भाववाच्य बनाइए

  1. मैं अब नहीं चल सकता। → मुझसे अब चला नहीं जाता।
  2. वह रात भर नहीं जाग सका। → उससे रात भर जागा नहीं गया।
  3. बीमार दादाजी नहीं उठ पाते। → बीमार दादाजी से उठा नहीं जाता।

लेखन में कौन-सा वाच्य चुनें

परीक्षा में तीनों वाच्य आते हैं, पर अच्छे लेखन में चुनाव का एक सिद्धांत है।

  • सामान्य गद्य में कर्तृवाच्य बेहतर है: वह छोटा, सीधा और जीवंत होता है। "हमने रिपोर्ट जमा कर दी" में "रिपोर्ट हमारे द्वारा जमा कर दी गई" से कम शब्द हैं और ज़िम्मेदारी साफ़ है।
  • कर्मवाच्य तब ठीक है जब कर्ता अज्ञात, अनावश्यक या जानबूझकर गौण हो: "दुकान का ताला तोड़ा गया", "बैठक कल रखी गई है।" सरकारी आदेशों और सूचनाओं में भी यह चलता है: "सभी कर्मचारियों को सूचित किया जाता है कि …"
  • ज़रूरत से ज़्यादा कर्मवाच्य हिंदी में अनुवाद जैसा लगता है। अंग्रेज़ी के "It is requested that…" का शब्दशः रूप "यह अनुरोध किया जाता है कि…" बोझिल है, जबकि "कृपया …" या "मेरा अनुरोध है कि …" सहज है। औपचारिक पत्रों में सहज वाक्य कैसे रखें, इसके नमूने पत्र-लेखन की मार्गदर्शिका में हैं।
  • भाववाच्य का स्थान सहज, भावनात्मक कथन में है: "अब और सहा नहीं जाता।" इसे औपचारिक विवरण में कम ही रखें।

आम गलतियाँ

गलतसहीकारण
रमा से पत्र लिखी जाती है।रमा से पत्र लिखा जाता है।क्रिया कर्म (पत्र, पु.) के अनुसार
मुझसे चली नहीं जाती।मुझसे चला नहीं जाता।भाववाच्य में क्रिया सदा पुल्लिंग एकवचन
राम द्वारा रोटी खाई।राम द्वारा रोटी खाई गई।"जाना" का भूतकालिक रूप छूट गया
उसने द्वारा खाना पकाया गया।उसके द्वारा / उससे खाना पकाया गया।"द्वारा" से पहले संबंध-रूप (उसके) आता है, "ने" नहीं
किताबें लाया गई।किताबें लाई गईं।कृदंत और "जाना", दोनों कर्म के अनुसार

वाच्य जाँचने में AdeptWrite कैसे मदद करता है

अपना मसौदा लिखने के बाद हिंदी ग्रामर चेकर में चिपकाकर देखें; वह व्याकरण, वर्तनी और विराम चिह्न के सुझाव हर बदलाव को हाइलाइट करके देता है। एक बार में अधिकतम 6,000 वर्ण जाँचे जा सकते हैं। यह टूल सहायक है, अंतिम निर्णय आपका है, ख़ासकर वाच्य जैसे नियमों में, जहाँ भाव और संदर्भ मायने रखते हैं। कर्मवाच्य से भरे भारी वाक्य को सहज करना हो तो वाक्य सुधारक सामान्य और औपचारिक मोड में नया रूप सुझाता है। वर्तनी के लिए हिंदी स्पेल चेकर है, और कर्ता-क्रिया-विशेषण जैसे आधार समझने के लिए शब्द-भेद की गाइड पढ़ सकते हैं।

दोहराने के लिए संक्षिप्त सूची

  • "ने" वाला वाक्य: कर्ता-प्रधान, कर्मवाच्य नहीं।
  • "से/द्वारा" + सकर्मक क्रिया + जाना: कर्मवाच्य।
  • "से" + अकर्मक क्रिया, अक्सर निषेध: भाववाच्य।
  • भाववाच्य की क्रिया सदा पुल्लिंग, एकवचन, अन्य पुरुष।
  • कर्मवाच्य की क्रिया कर्म के लिंग-वचन से मेल खाती है।
  • सामान्य लेखन में पहले कर्तृवाच्य आज़माएँ; कर्ता अज्ञात या अप्रासंगिक हो तभी कर्मवाच्य।

टूल आज़माएँ

हिंदी ग्रामर चेकर (व्याकरण जाँच)
हिंदी, अंग्रेज़ी और दूसरी भाषाओं में व्याकरण, वर्तनी और विराम चिह्न सुधारें — हर बदलाव हाइलाइट होता है।
टूल खोलें
वाक्य सुधारक (Sentence Rewriter)
उलझे, अटपटे या बहुत लंबे वाक्यों को साफ़ और सहज बनाएँ।
टूल खोलें
हिंदी स्पेल चेकर (वर्तनी जाँच)
हिंदी पाठ में शब्द-सूची (hi_IN) से अनजाने टाइपो और आम अमानक वर्तनी पकड़ें, सुझाव के साथ — जाँच आपके ब्राउज़र में होती है।
टूल खोलें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदी में वाच्य के कितने भेद हैं?

तीन भेद हैं: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य। कर्तृवाच्य में क्रिया कर्ता के अनुसार चलती है, कर्मवाच्य में कर्म के अनुसार, और भाववाच्य में किसी के अनुसार नहीं, बल्कि सदा पुल्लिंग एकवचन अन्य पुरुष रहती है।

कर्मवाच्य और भाववाच्य में क्या अंतर है?

कर्मवाच्य सकर्मक क्रिया से बनता है और क्रिया कर्म के लिंग-वचन से मेल खाती है, जैसे "पत्र लिखा गया"। भाववाच्य अकर्मक क्रिया से बनता है, उसमें कर्म नहीं होता और क्रिया अटल रहती है, जैसे "मुझसे चला नहीं जाता"।

"राम ने रोटी खाई" कौन-से वाच्य का वाक्य है?

इसे कर्ता-प्रधान वाक्य माना जाता है, कर्मवाच्य नहीं, क्योंकि कर्ता "ने" के साथ है और "से" या "द्वारा" नहीं लगा। इसमें क्रिया कर्म (रोटी) के अनुसार चलती है, जिसे कर्मणि प्रयोग कहा जाता है। परीक्षा में अपनी पाठ्यपुस्तक का वर्गीकरण देखें।

लेखन में कर्तृवाच्य बेहतर है या कर्मवाच्य?

सामान्य गद्य में कर्तृवाच्य छोटा, सीधा और स्पष्ट रहता है। कर्मवाच्य तब उपयुक्त है जब कर्ता अज्ञात या गौण हो, जैसे सूचनाओं और समाचार में। अनुवाद जैसे "अनुरोध किया जाता है" से बचकर "कृपया" या "मेरा अनुरोध है" लिखना अधिक स्वाभाविक है।

सभी गाइड