हिंदी व्याकरण और वर्तनी

हिंदी के आम अशुद्ध-शुद्ध शब्द: सही वर्तनी की जोड़ियाँ, कारण और नियम

AdeptWrite संपादकीय टीमअपडेट 11 मिनट में पढ़ें

हिंदी में ज़्यादातर चूक ह्रस्व-दीर्घ, ऋ/रि, श/ष/स, संयुक्ताक्षर और नुक़्ता में होती है। सही रूप हैं स्थिति, परीक्षा, कृपया और ज़रूर; स्थिती, परिक्षा, क्रिपया और जरुर अशुद्ध माने जाते हैं।

हिंदी में अशुद्ध वर्तनी कहाँ सबसे ज़्यादा होती है

हिंदी लिखते समय अशुद्धि अक्सर उच्चारण और लिखावट की दूरी से आती है। हम "स्थिती" बोलते हैं तो अंत की ध्वनि लगभग वैसी ही सुनाई देती है जैसी "स्थिति" में, इसलिए हाथ ग़लत मात्रा लिख बैठता है। यही हाल "परीक्षा", "आशीर्वाद" और "कृपया" का है। इस लेख में आम जोड़ियों को पाँच वर्गों में बाँटा गया है और हर जोड़ी के साथ कारण दिया है, ताकि आप रटने की जगह नियम समझ सकें।

आधार है केंद्रीय हिंदी निदेशालय (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) की पुस्तिका «देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण» और सामान्य मानक शब्दकोश। AdeptWrite के रिकॉर्ड में इसका संशोधित संस्करण 2024 का दर्ज है, पर पुस्तिका की मूल PDF हमारी जाँच के दिन (2026-11-01) खुल नहीं सकी। इसलिए यहाँ की जोड़ियाँ सामान्य मानक वर्तनी और तत्सम शब्दों के व्याकरण पर टिकी हैं, पुस्तिका के पन्ना-दर-पन्ना मिलान पर नहीं। परीक्षा, प्रकाशन या सरकारी कामकाज में किसी ख़ास रूप का आग्रह हो तो अपनी संस्था की नवीनतम निर्देश-पुस्तिका देख लें। यहाँ "अशुद्ध" का अर्थ है वह रूप जो मानक वर्तनी में स्वीकार नहीं किया जाता। जिन शब्दों के दो रूप चलन में हैं, वे वैकल्पिक हैं, अशुद्ध नहीं।

1. ह्रस्व और दीर्घ: इ/ई और उ/ऊ

तत्सम (संस्कृत से आए) शब्दों की वर्तनी संस्कृत के मूल रूप से चलती है। सबसे काम का नियम: "ति" से बनी भाववाचक संज्ञाएँ ह्रस्व इ पर समाप्त होती हैं, जैसे स्थिति, उपस्थिति, प्रगति, शक्ति, पूर्ति, संस्कृति।

शुद्धअशुद्धकारण
स्थिति, परिस्थिति, उपस्थितिस्थिती, परिस्थिती, उपस्थिती"ति" वाली संज्ञा, अंत में ह्रस्व इ
व्यक्ति, पूर्तिव्यक्ती, पूर्तीवही नियम
परीक्षापरिक्षापरि + ईक्षा की संधि से दीर्घ ई
प्रतीक्षा, समीक्षा, निरीक्षणप्रतिक्षा, समिक्षा, निरिक्षणधातु "ईक्ष्" (देखना) के कारण दीर्घ ई
आशीर्वादआशिर्वादमूल शब्द "आशीः" में दीर्घ ई
श्रीमतीश्रीमतिस्त्रीलिंग रूप में दीर्घ ई
भारतीय, राष्ट्रीयभारतिय, राष्ट्रिय"ईय" प्रत्यय में दीर्घ ई
सूचना, सूर्य, पूजासुचना, सुर्य, पुजामूल में दीर्घ ऊ
शुरुआतशुरूआत"शुरू" से बनते समय ह्रस्व उ हो जाता है
गुरु, ऋतु, पुरुष, वस्तुगुरू, ऋतू, पुरूष, वस्तूइनमें ह्रस्व उ है

"परीक्षा", "प्रतीक्षा", "समीक्षा" और "निरीक्षण" चारों में धातु "ईक्ष्" है। उपसर्ग का अंतिम "इ" और धातु का "ई" संधि से दीर्घ "ई" बनाते हैं। इसलिए जहाँ "देखने" का भाव हो, वहाँ दीर्घ ई याद रखें।

2. ऋ और रि: कृपया क्रिपया क्यों नहीं है

"ऋ" स्वर है, जिसकी मात्रा "ृ" है। बोलचाल में उसका उच्चारण "रि" जैसा सुनाई देता है, इसलिए लोग "कृपया" को "क्रिपया" या "किरपया" लिख देते हैं।

शुद्धअशुद्धकारण
कृपयाक्रिपया, किरपया"कृ" में ऋ की मात्रा
ऋषि, ऋतु, ऋणरिषि, रितु, रिनशब्द ऋ स्वर से शुरू होता है
कृषि, दृष्टि, सृष्टिक्रिषि, द्रिष्टि, स्रिष्टिधातु कृष्, दृश्, सृज्
अमृत, मृत्युअम्रित, म्रित्यु"मृ" में ऋ की मात्रा

इसी वर्ग में गृह (घर) और ग्रह (आकाशीय पिंड, ग्रहण) की जोड़ी है। दोनों शुद्ध हैं, पर अलग शब्द हैं। "गृहण" लिखना अशुद्धि है, सही "ग्रहण" है।

3. श, ष और स

बोलचाल में ष का उच्चारण श जैसा और कई क्षेत्रों में श का उच्चारण स जैसा हो जाता है, इसलिए तीनों आपस में बदल जाते हैं। यहाँ शब्द के मूल से पहचान सबसे भरोसेमंद है।

शुद्धअशुद्धकारण
शहरसहरफ़ारसी मूल का शब्द, श से लिखा जाता है
शांति, विशेष, प्रशासनसांति, विसेष, प्रसासनतत्सम शब्द, श से
विषय, भाषा, वर्षाविशय, भाशा, वर्शातत्सम शब्द, ष से
शिक्षासिक्षा, शिक्शाआरंभ श और "क्ष" संयुक्त
शोषणसोषण, शोशणआरंभ श, बीच में ष

इस वर्ग में पक्का नियम बनाना कठिन है। संदेह हो तो शब्दकोश देखने की आदत डालें।

4. संयुक्ताक्षर की चूक

शुद्धअशुद्धकारण
विद्यार्थीविधार्थी, विद्दार्थीविद्या + अर्थी, "द्य" संयुक्त
उज्ज्वलउज्जवलउत् + ज्वल, तीन व्यंजन का संयोग
ज्ञान, आज्ञाग्यान, आग्यासंस्कृत का "ज्ञ"
श्रेष्ठ, प्रतिष्ठाश्रेस्ठ, प्रतिष्टा"ष्ठ" संयुक्त
उद्घाटन, सद्भावनाउदघाटन, सदभावनाउत्/सत् + घ/भ की संधि

"उद्घाटन" और "सद्भावना" में उपसर्ग उत् या सत् है। आगे घोषित व्यंजन आने पर "त्" बदलकर "द्" हो जाता है और वह आगे के व्यंजन से जुड़कर एक ही संयुक्ताक्षर बनाता है। संधि तोड़कर देखने से बनावट याद रहती है।

5. नुक़्ता: ज़रूर, ग़लत, फ़ीस

नुक़्ता (व्यंजन के नीचे बिंदु) फ़ारसी, अरबी और अंग्रेज़ी से आए शब्दों की विशेष ध्वनियाँ ज़, फ़, ख़, ग़, क़ दिखाता है। मानक वर्तनी में ऐसे शब्दों में नुक़्ता लगाने की सलाह दी जाती है। रोज़मर्रा के बहुत-से अनौपचारिक लेखन में इसे छोड़ दिया जाता है, पर विद्यालयी पुस्तकों, समाचार-पत्रों और सरकारी प्रकाशनों में नुक़्ता वाला रूप चलता है।

शुद्धआम चूक
ज़रूरजरुर, जरूर
ज़्यादाजादा, ज्यादा
ज़िंदगी, ज़िलाजिंदगी, जिला
ख़ुश, ग़लत, ग़रीबखुश, गलत, गरीब
क़ानूनकानून
फ़ीस, फ़ोन, मुफ़्तफीस, फोन, मुफ्त
बाज़ार, सज़ाबाजार, सजा

कुछ जोड़ियों में नुक़्ता अर्थ भी बदल देता है: "राज" (शासन) और "राज़" (रहस्य), "सजा" (सँवारा हुआ) और "सज़ा" (दंड)।

6. अनुस्वार और चंद्रबिंदु

हिंदी या हिन्दी। पंचम वर्ण वाले संयुक्त रूप की जगह अनुस्वार (ं) लिखना मानकीकरण की सिफ़ारिश है, इसलिए हिंदी, संबंध, पंडित मानक रूप हैं। हिन्दी, सम्बन्ध भी चलते हैं, पर एक ही लेख में दोनों शैलियाँ मिलाना ठीक नहीं। AdeptWrite का स्पेल चेकर ऐसी असंगति को चिह्नित करने के लिए बनाया गया है, किसी एक रूप को ग़लत ठहराने के लिए नहीं।

चंद्रबिंदु (ँ) कब। जिन शब्दों में अनुनासिक स्वर है और शिरोरेखा के ऊपर कोई मात्रा नहीं लगी, वहाँ चंद्रबिंदु मानक है। ऊपर मात्रा हो तो अनुस्वार चलता है।

मानक रूपप्रचलित अन्य रूपकारण
यहाँ, कहाँ, जाँच, आँख, माँ, हँसनायहां, कहां, जांच, आंख, मां, हंसनाऊपर मात्रा नहीं, इसलिए चंद्रबिंदु
में, नहीं, मैं, हैंमेँ, नहीँ, मैँ, हैँशिरोरेखा पर मात्रा है, इसलिए अनुस्वार

"यहां" और "मां" जैसे रूप मुद्रित और ऑनलाइन लेखन में खूब चलते हैं, क्योंकि कीबोर्ड पर अनुस्वार लिखना आसान है। फिर भी निदेशालय के मानक में चंद्रबिंदु निर्धारित है।

7. एक-से सुनाई देने वाले अलग शब्द

ये अशुद्ध वर्तनी नहीं, ग़लत शब्द-चयन की चूक हैं। दोनों रूप अपनी जगह शुद्ध हैं।

  • अवलंब / अविलंब: सहारा / बिना देरी के।
  • अपेक्षा / उपेक्षा: आशा या तुलना / अनदेखी।
  • दिन / दीन: दिवस / ग़रीब या विनम्र।
  • कुल / कूल: वंश या कुल योग / किनारा।
  • सुत / सूत: पुत्र / धागा।
  • प्रसाद / प्रासाद: कृपा या चढ़ावे का अंश / महल।
  • परिणाम / परिमाण: नतीजा / मात्रा।
  • उपकार / अपकार: भलाई / बुराई।

याद रखने के पाँच तरीक़े

  1. शब्द का मूल पहचानें। "परीक्षा" में ईक्ष (देखना) है, इसलिए दीर्घ ई। "कृपा" में कृप् है, इसलिए ऋ।
  2. "ति" वाली संज्ञा के अंत में ह्रस्व इ। स्थिति, गति, मति, शक्ति, प्रगति।
  3. संधि तोड़कर देखें। उद्घाटन = उत् + घाटन, सद्भावना = सत् + भावना।
  4. बोलकर नहीं, देखकर जाँचें। बोलचाल का उच्चारण और मानक वर्तनी अलग हो सकते हैं।
  5. अपनी निजी सूची बनाएँ। जिन शब्दों में आप बार-बार चूकते हैं, उन्हें एक पन्ने पर लिखें। चूकें अक्सर कुछ ही शब्दों की दोहराई जाती हैं।

AdeptWrite के टूल इसमें कैसे मदद करते हैं

  • हिंदी स्पेल चेकर हिंदी पाठ में टाइपो और अमानक वर्तनी चिह्नित करके सुझाव देता है। उसकी जाँच आपके ब्राउज़र में चलती है और आधार हिंदी की शब्द-सूची तथा केंद्रीय हिंदी निदेशालय के मानक के नियम हैं। वह हर चूक नहीं पकड़ सकता: "गृह" की जगह "ग्रह" जैसी चूक, जहाँ दोनों शब्द अपनी जगह शुद्ध हैं, प्रायः पकड़ में नहीं आती।
  • हिंदी ग्रामर चेकर AI की मदद से वाक्य, वर्तनी और विराम चिह्न के सुधार सुझाता है और हर बदलाव हाइलाइट करता है, ताकि आप तय कर सकें कि क्या स्वीकारना है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्थिति सही है या स्थिती?

स्थिति सही है। "ति" से बनी तत्सम भाववाचक संज्ञाओं के अंत में ह्रस्व इ आती है, जैसे स्थिति, उपस्थिति, परिस्थिति, प्रगति और शक्ति। "स्थिती" मानक वर्तनी में अशुद्ध माना जाता है। पहचानने का आसान तरीक़ा यही नियम है।

परीक्षा सही है या परिक्षा?

परीक्षा सही है। इसमें उपसर्ग "परि" और धातु "ईक्ष्" (देखना) संधि से मिलकर दीर्घ ई बनाते हैं। यही नियम प्रतीक्षा, समीक्षा और निरीक्षण पर भी लागू होता है, इसलिए इन चारों शब्दों में दीर्घ ई ही लिखी जाती है।

कृपया में ऋ की जगह रि क्यों नहीं लिखते?

कृपया संस्कृत धातु "कृप्" से बना है और उसमें ऋ स्वर की मात्रा (ृ) है। "क्रिपया" जैसा रूप उच्चारण की नक़ल है, वर्तनी का नियम नहीं। यही बात कृषि, अमृत, मृत्यु और दृष्टि पर भी लागू होती है।

क्या नुक़्ता लगाना ज़रूरी है?

मानक वर्तनी में फ़ारसी, अरबी और अंग्रेज़ी मूल के शब्दों में नुक़्ता लगाने की सलाह दी जाती है, जैसे ज़रूर, क़ानून, फ़ीस। रोज़ के अनौपचारिक लेखन में लोग इसे अक्सर छोड़ देते हैं। परीक्षा, प्रकाशन और सरकारी लेखन में नुक़्ता वाला रूप ही बेहतर है।

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