अकादमिक लेखन

फ़ुटनोट (पाद-टिप्पणी) और एंडनोट (अंत-टिप्पणी): अंतर, नियम और हिंदी नमूने

AdeptWrite संपादकीय टीमअपडेट 8 मिनट में पढ़ें

पाद-टिप्पणी (फ़ुटनोट) उसी पृष्ठ के नीचे आती है और अंत-टिप्पणी (एंडनोट) अध्याय या ग्रंथ के अंत में। हिंदी शोध में पाद-टिप्पणी आम है। APA में स्रोत कोष्ठक में जाते हैं।

फ़ुटनोट और एंडनोट का सीधा अंतर

फ़ुटनोट (पाद-टिप्पणी) वह टिप्पणी है जो उसी पृष्ठ के निचले हिस्से में छपती है जहाँ पाठ में छोटा ऊपरी क्रमांक लगा हो। एंडनोट (अंत-टिप्पणी) वही टिप्पणी है, पर वह पृष्ठ के नीचे न आकर अध्याय के अंत में या पूरी पुस्तक के अंत में "टिप्पणियाँ" शीर्षक के नीचे एक साथ दी जाती है। दोनों का काम एक है: पाठ की धारा तोड़े बिना स्रोत बताना या कोई अतिरिक्त बात जोड़ना।

बातपाद-टिप्पणी (फ़ुटनोट)अंत-टिप्पणी (एंडनोट)
कहाँ आती हैउसी पृष्ठ के नीचेअध्याय या ग्रंथ के अंत में
पाठक को क्या सुविधापन्ना पलटे बिना स्रोत दिख जाता हैपृष्ठ साफ़ रहता है, पर पीछे जाना पड़ता है
हिंदी शोध-प्रबंधों मेंअधिक प्रचलितकुछ विश्वविद्यालयों और प्रकाशकों में
लंबी टिप्पणीपृष्ठ का आधा हिस्सा घेर सकती हैकोई दिक़्क़त नहीं

इस मार्गदर्शिका में स्कूल से नहीं, बी.ए. से लेकर पीएच.डी. तक के हिंदी शोध-कार्य की बात है। नियम विश्वविद्यालय, विभाग और शोध-निर्देशक के अनुसार बदलते हैं, इसलिए जहाँ आपकी नियमावली कुछ कहे, वही मानिए। यहाँ बताई गई बातें आम प्रचलन हैं, कोई एक राष्ट्रीय मानक नहीं।

पाद-टिप्पणी कब लगाएँ

पाद-टिप्पणी के चार आम उपयोग हैं।

  1. स्रोत बताने के लिए। किसी कथन, उद्धरण या विचार का आधार दिखाना।
  2. अतिरिक्त स्पष्टीकरण के लिए। कोई ऐसी जानकारी जो मुख्य तर्क में बाधा बनेगी, पर पाठक के काम की है।
  3. अन्य भाषा के पाठ के लिए। उद्धरण का मूल पाठ या अनुवाद देना।
  4. अन्य खंड की ओर संकेत के लिए। जैसे "इस पर विस्तार से तृतीय अध्याय में चर्चा है।"

कोई टिप्पणी तभी लगाइए जब वह पाठक के काम की हो। हर वाक्य पर क्रमांक चिपका देना पन्ने को बोझिल बनाता है।

क्रमांक के नियम

  • क्रमांक पाठ में वाक्य के अंत में, विराम चिह्न के बाद छोटे ऊपरी अंक के रूप में लगता है, जैसे "…कहा था।¹"। कुछ विभाग विराम चिह्न से पहले लगाने को भी कहते हैं, इसलिए नियमावली देखिए।
  • क्रमांक क्रम से चलते हैं: 1, 2, 3। शोध-प्रबंध में सामान्यतः हर अध्याय में 1 से नई शुरुआत होती है, पर कुछ विभाग पूरे ग्रंथ में लगातार क्रमांक माँगते हैं।
  • पाठ का क्रमांक और टिप्पणी का क्रमांक एक ही अंक-रूप में रखिए। देवनागरी अंक (१, २, ३) या अंतरराष्ट्रीय अंक (1, 2, 3) में से एक चुनिए और पूरे ग्रंथ में वही रखिए। AdeptWrite की हिंदी सामग्री में अंतरराष्ट्रीय अंक प्रयुक्त होते हैं।
  • एक ही स्रोत दोबारा आए तो पूरा विवरण फिर न लिखें। संक्षिप्त रूप दें, जैसे "शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, पृ. 140।" लगातार दो टिप्पणियाँ एक ही स्रोत की हों तो "वही, पृ. 141।" लिखने का चलन है।
  • पाठ में उद्धरण का चिह्न और पाद-टिप्पणी का क्रमांक दोनों साथ हों, तो क्रमांक उद्धरण के बंद होने के बाद आता है।

हिंदी पाद-टिप्पणी के तीन नमूने

नीचे के नमूने हिंदी विभागों में प्रचलित एक सामान्य ढाँचे के हैं: लेखक, कृति, प्रकाशन-विवरण, पृष्ठ। आपके विभाग का क्रम या विराम-चिह्न अलग हो सकता है, तब उसे मानिए। प्रकाशक और वर्ष वही लिखिए जो आपके हाथ की प्रति के आवरण-पृष्ठ पर छपा है।

पुस्तक

रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, (प्रकाशक और संस्करण-वर्ष: अपनी प्रति के अनुसार), पृ. 140।

पाठ में लेखक का नाम पहले, कृति का नाम तिरछे अक्षरों में, फिर प्रकाशन-विवरण और अंत में पृष्ठ-संख्या आती है। "पृ." का अर्थ पृष्ठ है। एक से अधिक पृष्ठ हों तो "पृ. 140-42" लिखा जाता है।

पत्रिका या शोध-जर्नल का लेख

इस पंक्ति का उदाहरण काल्पनिक है। मीना वर्मा, "आधुनिक हिंदी कहानी में ग्रामीण स्त्री", भाषा-विमर्श (शोध-पत्रिका), खंड 12, अंक 2, 2019, पृ. 45-58।

लेख का शीर्षक उद्धरण-चिह्नों में और पत्रिका का नाम तिरछे अक्षरों में रखा जाता है। खंड, अंक और वर्ष जोड़ने से पाठक पत्रिका तक पहुँच पाता है। अगर लेख का DOI हो, तो अंत में दीजिए।

वेबसाइट

भारत की जनगणना, पंजीयक महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त का कार्यालय, भारत सरकार, जनगणना वेबसाइट (censusindia.gov.in), पृष्ठ का शीर्षक, देखने की तिथि: 2026-11-01।

वेबसाइट की टिप्पणी में पृष्ठ के रचयिता या संस्था, पृष्ठ का शीर्षक, वेब पता और वह तिथि लिखिए जब आपने उसे देखा। वेब पृष्ठ बदलते या हट जाते हैं, इसलिए देखने की तिथि ज़रूरी है। वेब पता वही रखिए जो ब्राउज़र में खुला हो और खोलकर जाँच लीजिए कि वह चलता है।

Word में पाद-टिप्पणी और अंत-टिप्पणी कैसे डालें

Microsoft Word में यह सुविधा "संदर्भ" (References) टैब में है।

  1. कर्सर को वाक्य के उस स्थान पर रखिए जहाँ क्रमांक चाहिए।
  2. संदर्भ टैब में "फ़ुटनोट डालें" (Insert Footnote) दबाइए। शॉर्टकट Ctrl+Alt+F है। अंत-टिप्पणी के लिए "एंडनोट डालें" या Ctrl+Alt+D।
  3. पृष्ठ के नीचे खुले स्थान में टिप्पणी लिखिए। क्रमांक Word अपने आप लगाता और बदलता है, इसलिए बीच में नई टिप्पणी जोड़ने पर आगे के क्रमांक अपने आप ठीक हो जाते हैं।
  4. क्रमांक का रूप बदलने के लिए संदर्भ टैब में फ़ुटनोट समूह का छोटा तीर खोलिए। वहाँ स्थान (पृष्ठ का नीचे या पाठ के नीचे), संख्या-रूप, शुरुआती अंक और हर अध्याय में नई शुरुआत जैसे विकल्प मिलते हैं।

देवनागरी अंकों के बारे में सावधानी रखिए। संख्या-रूप की सूची में कौन-से अंक-रूप दिखेंगे, यह Word के संस्करण और आपके कंप्यूटर की भाषा-सेटिंग पर निर्भर करता है। यदि देवनागरी अंक का विकल्प न दिखे, तो अंतरराष्ट्रीय अंक रखना सबसे सुरक्षित है। हाथ से अंक टाइप न करें, क्योंकि तब स्वतः क्रमांकन टूट जाता है। Word की जगह Google Docs में भी "डालें" मेनू से फ़ुटनोट मिलता है, पर वहाँ अंत-टिप्पणी की सुविधा सीमित है, इसलिए अंत-टिप्पणी चाहिए तो Word में लिखना बेहतर है।

पाद-टिप्पणी में हिंदी पाठ का फ़ॉन्ट भी जाँच लीजिए। मुख्य पाठ यूनिकोड देवनागरी फ़ॉन्ट में और टिप्पणी किसी और फ़ॉन्ट में हो, तो मात्राएँ टूटी दिख सकती हैं। टिप्पणी का आकार सामान्यतः मुख्य पाठ से एक-दो अंक छोटा रखा जाता है।

APA शैली में पाद-टिप्पणी की जगह

APA (7वाँ संस्करण) लेखक-वर्ष पद्धति है। स्रोत पाठ में कोष्ठक में आता है, जैसे (शर्मा, 2020, पृ. 14), और पूरा विवरण अंत की संदर्भ-सूची में। इसलिए APA में स्रोत बताने के लिए पाद-टिप्पणी नहीं लगती। APA में पाद-टिप्पणी का सीमित काम है: कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण देना या कॉपीराइट की अनुमति का उल्लेख करना। विज्ञान, समाजविज्ञान और शिक्षा के कई शोध-कार्य APA अपनाते हैं।

आधारमानविकी / हिंदी साहित्य विभाग की आम परिपाटीAPA शैली
स्रोत कहाँपाद-टिप्पणी या अंत-टिप्पणी मेंकोष्ठक में (लेखक, वर्ष), विवरण संदर्भ-सूची में
अंत में सूचीग्रंथ-सूचीसंदर्भ-सूची
पाद-टिप्पणी का कामस्रोत और टिप्पणी, दोनोंकेवल अतिरिक्त टिप्पणी
Chicago का नोट्स-ग्रंथ-सूची रूपइसी से मेल खाता हैलागू नहीं

Chicago शैली का "नोट्स और ग्रंथ-सूची" रूप पाद-टिप्पणी पर टिका है और हिंदी विभागों की परिपाटी से मिलता-जुलता है। ग्रंथ-सूची और संदर्भ-सूची का फ़र्क़ अलग से ग्रंथ-सूची और संदर्भ-सूची में अंतर में समझाया गया है।

आम ग़लतियाँ

  • एक ही शोध-कार्य में दो पद्धतियाँ मिलाना। पाद-टिप्पणी में स्रोत देकर साथ में कोष्ठक में (लेखक, वर्ष) भी लिख देना।
  • अधूरा विवरण। केवल लेखक का नाम और पृष्ठ लिखना, कृति का नाम छोड़ देना।
  • हाथ से क्रमांक लगाना। बाद में टिप्पणी जोड़ने पर क्रम बिगड़ जाता है।
  • ग्रंथ-सूची छोड़ देना। कई विभाग पाद-टिप्पणी के साथ भी अंत में ग्रंथ-सूची माँगते हैं।
  • वेब स्रोत में देखने की तिथि न देना।
  • बहुत लंबी टिप्पणी। अगर टिप्पणी आधा पृष्ठ ले ले, तो वह बात मुख्य पाठ में या परिशिष्ट में जानी चाहिए।
  • उद्धरण को बिना चिह्न और बिना स्रोत के उठा लेना। यह साहित्यिक चोरी की श्रेणी में आता है; इससे बचने के उपाय साहित्यिक चोरी से कैसे बचें में हैं।

जमा करने से पहले की जाँच-सूची

  1. क्या विभाग की नियमावली में पाद-टिप्पणी, अंत-टिप्पणी या कोष्ठक-पद्धति तय है?
  2. क्या हर क्रमांक की टिप्पणी उसी पृष्ठ पर (या अंत में) मौजूद है और क्रम में है?
  3. क्या हर पहली टिप्पणी में पूरा विवरण है और बाद की में संक्षिप्त रूप?
  4. क्या अंक-रूप पूरे ग्रंथ में एक-सा है?
  5. क्या वेब स्रोतों पर देखने की तिथि और चलता हुआ वेब पता है?
  6. क्या अंत में ग्रंथ-सूची या संदर्भ-सूची जुड़ी है?
  7. क्या टिप्पणियों की वर्तनी, पूर्ण विराम और नुक़्ता जाँच लिए गए हैं?

AdeptWrite के टूल इसमें कैसे काम आते हैं

AdeptWrite के टूल एक बार में 6,000 अक्षरों तक के पाठ पर चलते हैं।

  • साइटेशन जनरेटर में स्रोत का विवरण भरने पर APA 7, MLA 9, Chicago, Harvard या IEEE शैली की प्रविष्टि बनती है। यह जाँच आपके ब्राउज़र में होती है। ध्यान रखिए कि प्रविष्टि में अंग्रेज़ी शैली के संक्षेप (जैसे et al., pp.) आ सकते हैं। हिंदी पाद-टिप्पणी में उन्हें "आदि" या "पृ." में बदलना और शैली-पुस्तिका से मिलान करना आपको ख़ुद करना होगा।
  • हिंदी प्लेजरिज़्म चेकर से जाँचिए कि कोई उद्धृत अंश बिना स्रोत के तो नहीं रह गया। वह खोजे गए स्रोतों में मिलान दिखाता है; 0 % का अर्थ केवल इतना है कि खोजे गए स्रोतों में मेल नहीं मिला।
  • हिंदी स्पेल चेकर टिप्पणियों की वर्तनी में टाइपो पकड़ने में सहायक है, जिसकी जाँच आपके ब्राउज़र में चलती है। यह हर ग़लती नहीं पकड़ सकता, इसलिए अंतिम पाठ ख़ुद पढ़िए।
  • हिंदी सारांश टूल लंबे स्रोत का संक्षेप समझने में मदद करता है, पर पाद-टिप्पणी में वही लिखिए जो मूल स्रोत में सचमुच है।

संदर्भ जोड़ने से पहले स्रोतों की पहचान भी ज़रूरी है; इसके लिए प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत में अंतर देखिए। हिंदी में स्रोत-निर्भर लेखन में सारांश कैसे लिखें भी काम आएगा।

टूल आज़माएँ

साइटेशन जनरेटर (संदर्भ सूची)
APA 7, MLA 9, Chicago, Harvard और IEEE शैली में संदर्भ और ग्रंथ-सूची की प्रविष्टि तुरंत बनाएँ।
टूल खोलें
हिंदी प्लेजरिज़्म चेकर (साहित्यिक चोरी जाँच)
पाठ का मिलान विकिपीडिया, विकिस्रोत और खुले शोध-स्रोतों से करें; मिलते अंश और जाँचे गए स्रोत साफ़ दिखते हैं।
टूल खोलें
हिंदी स्पेल चेकर (वर्तनी जाँच)
हिंदी पाठ में शब्द-सूची (hi_IN) से अनजाने टाइपो और आम अमानक वर्तनी पकड़ें, सुझाव के साथ — जाँच आपके ब्राउज़र में होती है।
टूल खोलें
हिंदी सारांश टूल (Summarizer)
लंबे लेख या पाठ का सार मुख्य बिंदुओं, एक अनुच्छेद या एक वाक्य में पाएँ।
टूल खोलें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ़ुटनोट और एंडनोट में मुख्य अंतर क्या है?

फ़ुटनोट यानी पाद-टिप्पणी उसी पृष्ठ के नीचे छपती है जहाँ क्रमांक लगा है, इसलिए पाठक को पन्ना पलटना नहीं पड़ता। एंडनोट यानी अंत-टिप्पणी अध्याय या ग्रंथ के अंत में एक साथ दी जाती है। दोनों का क्रमांक पाठ में एक जैसा लगता है।

क्या हिंदी शोध-प्रबंध में पाद-टिप्पणी अनिवार्य है?

यह विश्वविद्यालय और विभाग की नियमावली पर निर्भर है। हिंदी साहित्य के शोध में पाद-टिप्पणी प्रचलित है, पर कुछ संस्थान अंत-टिप्पणी या APA जैसी कोष्ठक-पद्धति माँगते हैं। अपने शोध-निर्देशक से लिखित प्रारूप माँग लेना सबसे सुरक्षित है।

क्या APA शैली में फ़ुटनोट का प्रयोग होता है?

APA में स्रोत कोष्ठक में (लेखक, वर्ष) लिखे जाते हैं और पूरा विवरण संदर्भ-सूची में रहता है। पाद-टिप्पणी केवल अतिरिक्त स्पष्टीकरण या कॉपीराइट-अनुमति जैसे सीमित काम के लिए आती है, स्रोत बताने के लिए नहीं।

Word में देवनागरी अंकों में फ़ुटनोट क्रमांक कैसे लगाएँ?

संदर्भ टैब में फ़ुटनोट समूह का तीर खोलकर संख्या-रूप बदलिए। देवनागरी अंक का विकल्प Word के संस्करण और भाषा-सेटिंग पर निर्भर है। न दिखे तो अंतरराष्ट्रीय अंक रखिए। हाथ से अंक टाइप न करें, वरना स्वतः क्रमांकन टूट जाएगा।

सभी गाइड