हिंदी व्याकरण और वर्तनी

हिंदी में शब्द-भेद: विकारी और अविकारी शब्द, उदाहरण और पहचान की तालिका

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हिंदी में आठ शब्द-भेद हैं। विकारी: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया। अविकारी: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक। हर भेद नीचे उदाहरण और पहचान-विधि के साथ है।

सीधा जवाब: हिंदी में शब्द-भेद कितने हैं

हिंदी की पारंपरिक व्याकरण-पद्धति में शब्दों को उनके रूप-परिवर्तन के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है और कुल आठ भेद माने जाते हैं।

वर्गअर्थभेद
विकारीवाक्य में प्रयोग पर जिनका रूप बदलता है (लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार)संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया
अविकारी (अव्यय)जिनका रूप हर स्थिति में एक-सा रहता हैक्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक

यह वर्गीकरण अंग्रेज़ी की "parts of speech" सूची की नक़ल नहीं है। हिंदी में आधार यह है कि शब्द वाक्य में रूप बदलता है या नहीं। इसीलिए अंग्रेज़ी के article की जगह यहाँ कोई अलग भेद नहीं है, और "preposition" का काम अधिकतर परसर्ग (ने, को, से, का) तथा संबंधबोधक शब्द मिलकर करते हैं।

एक बात पहले ही स्पष्ट कर दें: हिंदी व्याकरण की अलग-अलग पुस्तकें उप-भेदों के नाम और संख्या में थोड़ा अंतर रखती हैं। कुछ पुस्तकें निपात को अलग भेद मानती हैं, इसलिए गिनती थोड़ी भिन्न मिल सकती है। परीक्षा के लिए अपनी पाठ्यपुस्तक का वर्गीकरण मानें। यह पन्ना सबसे प्रचलित आठ भेदों वाली पद्धति पर चलता है।

शब्द-भेद जानना क्यों काम का है

वाक्य में गलती अक्सर शब्द के वर्ग की पहचान न होने से होती है। "अच्छी लड़का" में विशेषण ने अपने विशेष्य के लिंग का पालन नहीं किया। "राम ने रोटी खाया" में क्रिया ने कर्म का साथ नहीं दिया। "मेरे को" जैसे प्रयोग में सर्वनाम का सही कारक-रूप नहीं चुना गया। हर भेद के नियम जान लेने पर ये चूकें अपने-आप दिखने लगती हैं, और वाच्य, वर्तनी और विराम चिह्नों के नियम भी आसानी से बैठते हैं।

विकारी शब्द

1. संज्ञा

संज्ञा किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, जाति, भाव या समूह का नाम है।

उप-भेदअर्थउदाहरण
व्यक्तिवाचककिसी एक विशेष का नामगंगा, दिल्ली, प्रेमचंद, हिमालय
जातिवाचकपूरी जाति का बोधनदी, लड़का, शहर, पर्वत
भाववाचकगुण, दशा या भाव का नामईमानदारी, बचपन, मिठास, थकान
समूहवाचकसमूह का बोधकक्षा, सेना, परिवार, भीड़
द्रव्यवाचकपदार्थ का नामदूध, सोना, पानी, लोहा

कुछ पुस्तकें केवल तीन उप-भेद (व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक) मानती हैं और समूह तथा द्रव्य को जातिवाचक में गिनती हैं। यह मतभेद वर्गीकरण का है, अर्थ का नहीं।

संज्ञा के रूप-परिवर्तन :

  • लिंग : पुल्लिंग या स्त्रीलिंग (लड़का, लड़की; घोड़ा, घोड़ी)। हिंदी में केवल ये दो लिंग हैं।
  • वचन : एकवचन या बहुवचन (लड़का, लड़के; लड़की, लड़कियाँ)।
  • कारक : परसर्ग लगने पर तिर्यक् रूप बनता है (लड़का, पर लड़के को, लड़के ने)।

2. सर्वनाम

सर्वनाम संज्ञा के स्थान पर आता है, ताकि वही नाम बार-बार न दोहराना पड़े।

उप-भेदउदाहरण
पुरुषवाचक : उत्तम पुरुष (बोलने वाला)मैं, हम
मध्यम पुरुष (सुनने वाला)तू, तुम, आप
अन्य पुरुष (जिसकी बात हो)वह, वे, यह, ये
निश्चयवाचकयह, वह (किसी निश्चित की ओर संकेत)
अनिश्चयवाचककोई, कुछ
संबंधवाचकजो, सो
प्रश्नवाचककौन, क्या
निजवाचकआप, स्वयं, खुद

ध्यान दें कि "आप" दो रूपों में आता है: आदरसूचक मध्यम पुरुष ("आप कब आए?") और निजवाचक ("वह आप ही चला गया")। इसके सही प्रयोग पर आप, तुम और तू में विस्तार से लिखा है।

सर्वनाम में भी कारक के अनुसार रूप बदलता है: मैं के साथ मुझे, मुझसे, मेरा; वह के साथ उसे, उससे, उसका।

3. विशेषण

विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है। जिसकी विशेषता बताई जाए, वह विशेष्य कहलाता है।

उप-भेदअर्थउदाहरण
गुणवाचकगुण, रंग, आकार, दशाअच्छा, लाल, मोटा, ताज़ा
संख्यावाचकगिनती या क्रमचार, दोनों, पहला, चौथा
परिमाणवाचकमात्रा या मापथोड़ा, बहुत, दो लीटर
सार्वनामिकसर्वनाम जो विशेषण की तरह आएयह किताब, कोई आदमी, कौन-सा रास्ता

आकारांत विशेषण और अनाकारांत विशेषण :

हिंदी में विशेषण का रूप विशेष्य के अनुसार बदलता है, पर यह सभी विशेषणों में नहीं होता।

  • आकारांत (अंत में "आ") विशेषण बदलते हैं : अच्छा लड़का, अच्छे लड़के, अच्छी लड़की।
  • अनाकारांत विशेषण नहीं बदलते : सुंदर लड़का, सुंदर लड़की, सुंदर लड़के। ऐसे ही लाल, भारी, सरल।

विशेषण की संगति की भूलें सबसे आम हैं, इसलिए इस नियम को याद रखें: आ-अंत वाला विशेषण अपने विशेष्य के लिंग-वचन-कारक के अनुसार चलता है।

4. क्रिया

क्रिया वह शब्द है जिससे किसी काम का होना या करना पता चले। धातु (मूल रूप, जैसे "खा", "पढ़") में प्रत्यय लगकर क्रिया के रूप बनते हैं।

कर्म के आधार पर :

  • सकर्मक : जिसका फल कर्ता से हटकर कर्म पर पड़े (राम फल खाता है)। प्रश्न "क्या?" या "किसे?" का उत्तर कर्म होता है।
  • अकर्मक : जिसका फल कर्ता पर ही पड़े (बच्चा हँसता है, पौधा सूख गया)।

रचना के आधार पर : सामान्य क्रिया (पढ़ा), संयुक्त क्रिया (खा लिया, चला गया), प्रेरणार्थक (पढ़वाना, खिलाना), नामधातु (हाथियाना, अपनाना)।

काल : भूत (गया), वर्तमान (जाता है), भविष्य (जाऊँगा)।

क्रिया का लिंग-वचन-पुरुष से संबंध बहुत महत्त्वपूर्ण है, और भूतकाल में "ने" वाले वाक्यों में क्रिया का मेल कर्ता से नहीं, कर्म से होता है (आगे "संगति" खंड देखें)।

अविकारी शब्द (अव्यय)

5. क्रियाविशेषण

क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषता बताता है: कब, कहाँ, कैसे, कितना।

प्रकारउदाहरण
कालवाचकआज, कल, अभी, सदा, कभी-कभी
स्थानवाचकयहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, आगे
रीतिवाचकधीरे, तेज़, ध्यान से, ज़ोर से
परिमाणवाचकबहुत, कम, ज़रा, अधिक

उदाहरण : "वह धीरे चलता है।" यहाँ "धीरे" क्रिया "चलता है" की विशेषता बता रहा है और उसका रूप नहीं बदलेगा, चाहे कर्ता स्त्री हो या पुरुष। क्रियाविशेषण दूसरे क्रियाविशेषण की भी विशेषता बता सकता है, जैसे "बहुत धीरे" में "बहुत"।

6. संबंधबोधक

संबंधबोधक संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के किसी दूसरे शब्द से जोड़ता है: के पास, के बिना, के साथ, के ऊपर, के कारण, की ओर, तक।

  • "घर के पास एक नदी है।"
  • "बिना मेहनत के सफलता नहीं मिलती।"

बहुत-से संबंधबोधक असल में क्रियाविशेषण से ही बने हैं और वाक्य में प्रयोग से पहचाने जाते हैं। "ऊपर देखो" में "ऊपर" क्रियाविशेषण है, जबकि "छत के ऊपर" में वही शब्द संबंधबोधक है, क्योंकि वह "छत" का संबंध किसी और से जोड़ रहा है।

7. समुच्चयबोधक

समुच्चयबोधक दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ता है।

प्रकारउदाहरण
समानाधिकरण (बराबर के वाक्य जोड़ने वाले) : संयोजक, विभाजक, विरोधदर्शक, परिणामदर्शकऔर, तथा; या, अथवा; पर, किंतु, परंतु; इसलिए
व्यधिकरण (मुख्य और आश्रित वाक्य जोड़ने वाले) : कारणवाचक, उद्देश्यवाचक, संकेतवाचक, स्वरूपवाचकक्योंकि; ताकि; यदि...तो; कि

उदाहरण : "वह थका था, इसलिए जल्दी सो गया।" "इसलिए" परिणाम जोड़ने वाला समुच्चयबोधक है। जोड़ने वाले शब्दों पर और सामग्री हिंदी योजक शब्दों वाले लेख में मिलेगी।

8. विस्मयादिबोधक

विस्मयादिबोधक हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, पुकार जैसे भाव प्रकट करता है और अक्सर विस्मयादिबोधक चिह्न (!) के साथ आता है।

  • हर्ष : वाह! शाबाश!
  • शोक : हाय! उफ़!
  • आश्चर्य : अरे! ओह!
  • संबोधन : हे ईश्वर! अरे भाई!

इसका वाक्य के बाक़ी हिस्से से व्याकरणिक संबंध नहीं होता।

लिंग, वचन और कारक की संगति

हिंदी वाक्य में शब्द-भेद आपस में संगति (मेल) रखते हैं। संगति के तीन मुख्य नियम:

  1. विशेषण–विशेष्य : आकारांत विशेषण विशेष्य के लिंग-वचन के अनुसार बदलता है (काला कुत्ता, काली बिल्ली, काले कुत्ते)।
  2. कर्ता–क्रिया : सामान्यतः क्रिया कर्ता के लिंग-वचन-पुरुष के अनुसार चलती है (लड़का जाता है, लड़की जाती है, लड़के जाते हैं)।
  3. कर्म–क्रिया (ने के साथ) : भूतकाल की सकर्मक क्रिया में कर्ता के साथ "ने" लगे और कर्म के साथ "को" न लगा हो, तो क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुसार चलती है।
वाक्यक्रिया किससे मेल खाती है
लड़का रोटी खाता है।कर्ता (लड़का)
लड़के ने रोटी खाई।कर्म (रोटी, स्त्रीलिंग)
लड़के ने आम खाया।कर्म (आम, पुल्लिंग)
लड़के ने रोटी को देखा।कर्म पर "को" है, इसलिए क्रिया पुल्लिंग एकवचन (डिफ़ॉल्ट रूप)

तीसरा नियम ही "राम ने रोटी खाया" जैसी चूक का कारण है: सही रूप "राम ने रोटी खाई" है।

कारक और परसर्ग

संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों से संबंध कारक कहलाता है, और उसे परसर्ग (विभक्ति-चिह्न) व्यक्त करते हैं।

कारकपरसर्गउदाहरण
कर्तानेराम ने पत्र लिखा।
कर्मकोमाँ ने बच्चे को बुलाया।
करणसे, के द्वाराकलम से लिखो।
संप्रदानको, के लिएभिखारी को दान दो।
अपादानसे (अलग होने के अर्थ में)पेड़ से पत्ता गिरा।
संबंधका, के, कीराम का घर।
अधिकरणमें, परमेज़ पर किताब है।
संबोधनहे, अरेहे प्रभु!

परसर्ग लगते ही संज्ञा का आकारांत पुल्लिंग रूप बदलता है: लड़का → लड़के को, लड़कों से। यह तिर्यक् रूप है, और इसे भूलने से "लड़का को" जैसी भूल होती है।

पहचान की त्वरित तालिका

किसी शब्द का भेद तय करने के लिए ये सवाल क्रम से पूछें:

सवालहाँ तोउदाहरण
क्या यह किसी का नाम है?संज्ञाकिताब, खुशी, मुंबई
क्या यह संज्ञा की जगह आता है?सर्वनामवह, हम, कौन
क्या यह संज्ञा की विशेषता बताता है?विशेषणऊँचा, तीन, कुछ
क्या इसमें काम का भाव है और काल के रूप बनते हैं?क्रियालिखना, गया, खाऊँगा
क्या यह क्रिया (या विशेषण) की विशेषता बताता है और रूप नहीं बदलता?क्रियाविशेषणजल्दी, यहाँ, बहुत
क्या यह संज्ञा के बाद आकर उसका संबंध बताता है?संबंधबोधकके पास, तक, के बिना
क्या यह दो शब्द या वाक्य जोड़ता है?समुच्चयबोधकऔर, लेकिन, क्योंकि
क्या यह केवल भाव प्रकट करता है?विस्मयादिबोधकवाह!, अरे!

एक ही शब्द वाक्य के अनुसार अलग भेद में आ सकता है, इसलिए शब्द का भेद वाक्य में उसके काम से तय होता है, केवल शब्द से नहीं।

शब्दवाक्यभेद
बादउसके बाद वह गयासंबंधबोधक
बादवह बाद में आयाक्रियाविशेषण
कलकल बारिश होगीक्रियाविशेषण (कालवाचक)
कलकल का काम आज करोविशेषण की तरह प्रयुक्त (सार्वनामिक/कालवाचक, पुस्तकों में भिन्न)
किउसने कहा कि वह आएगासमुच्चयबोधक
बहुतबहुत लोग आएविशेषण (परिमाणवाचक)
बहुतवह बहुत हँसाक्रियाविशेषण

पूरा वाक्य-विश्लेषण: एक नमूना

वाक्य : "मेरी छोटी बहन ने कल बाज़ार में नई किताबें खरीदीं और घर आकर ख़ुशी से कहा, 'वाह!'"

शब्दभेद
मेरीसर्वनाम (संबंध कारक, सार्वनामिक विशेषण की तरह प्रयुक्त)
छोटीगुणवाचक विशेषण (स्त्रीलिंग, "बहन" के साथ)
बहनजातिवाचक संज्ञा
नेपरसर्ग (कर्ता कारक)
कलक्रियाविशेषण (कालवाचक)
बाज़ारजातिवाचक संज्ञा
मेंपरसर्ग (अधिकरण कारक)
नईगुणवाचक विशेषण (स्त्रीलिंग बहुवचन के साथ)
किताबेंजातिवाचक संज्ञा (बहुवचन)
खरीदींसकर्मक क्रिया (भूतकाल, कर्म "किताबें" के अनुसार स्त्रीलिंग बहुवचन)
औरसमुच्चयबोधक
घरसंज्ञा
आकरपूर्वकालिक क्रिया
ख़ुशी सेक्रियाविशेषण (रीतिवाचक)
कहासकर्मक क्रिया
वाहविस्मयादिबोधक

यह विश्लेषण पाठ्यपुस्तकों में दिए रूप से कुछ अलग दिख सकता है, क्योंकि कुछ पुस्तकें "मेरी" को सीधे सर्वनाम और कुछ सार्वनामिक विशेषण कहती हैं। तर्क समझना ज़्यादा ज़रूरी है।

आम गलतियाँ और उनके सुधार

गलतसहीनियम
अच्छी लड़काअच्छा लड़काविशेषण विशेष्य के लिंग का अनुसरण करे
राम ने रोटी खायाराम ने रोटी खाईने-प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार
मेरे को पुस्तक चाहिएमुझे पुस्तक चाहिएसर्वनाम का सही कारक-रूप
लड़का को बुलाओलड़के को बुलाओपरसर्ग से पहले तिर्यक् रूप
हम सब चलेंगाहम सब चलेंगेबहुवचन के साथ बहुवचन क्रिया
सुंदरी लड़कीसुंदर लड़कीअनाकारांत विशेषण नहीं बदलते

परीक्षा और लेखन के लिए अभ्यास

इन वाक्यों में रेखांकित शब्द का भेद पहचानें और फिर उत्तर देखें:

  1. "वह धीरे चलता है।" (उत्तर : क्रियाविशेषण)
  2. "कौन आया है?" (उत्तर : प्रश्नवाचक सर्वनाम)
  3. "मीठा फल सबको पसंद है।" (उत्तर : गुणवाचक विशेषण)
  4. "अरे! तुम यहाँ?" (उत्तर : विस्मयादिबोधक)
  5. "मैं जाऊँगा परंतु देर से।" (उत्तर : समुच्चयबोधक)
  6. "मेज़ के ऊपर पुस्तक है।" (उत्तर : संबंधबोधक)

स्वयं अभ्यास के लिए किसी अख़बार के संपादकीय का एक अनुच्छेद लें और हर शब्द का भेद लिखें। इससे वाक्य-रचना की पकड़ बढ़ती है।

AdeptWrite के साथ उपयोग

हिंदी ग्रामर चेकर विराम चिह्न, दोहराए शब्द और कुछ आम व्याकरण-वर्तनी गड़बड़ियाँ दिखाता है। वह हर लिंग-वचन की संगति की भूल नहीं पकड़ता, इसलिए ऊपर की तालिकाओं से अपना पाठ मिलाते रहें। वर्तनी के लिए हिंदी स्पेल चेकर केंद्रीय हिंदी निदेशालय के मानक वर्तनी-नियमों के आधार पर सुझाव देता है और जाँच आपके ब्राउज़र में होती है। शब्द का अर्थ या वैकल्पिक शब्द खोजने के लिए हिंदी शब्दकोश और पर्यायवाची शब्द टूल काम आते हैं। दो-तीन समान शब्दों के भ्रम के लिए भ्रमित करने वाले हिंदी शब्द पढ़ें।

याद रखने की जाँच-सूची

  • शब्द आठ भेदों में बँटते हैं: चार विकारी, चार अविकारी।
  • भेद शब्द से नहीं, वाक्य में उसके काम से तय होता है।
  • आकारांत विशेषण विशेष्य के अनुसार बदलता है, अनाकारांत नहीं।
  • ने के साथ भूतकालीन सकर्मक क्रिया कर्म के अनुसार चलती है।
  • परसर्ग से पहले आकारांत पुल्लिंग संज्ञा का तिर्यक् रूप आता है।
  • अपनी पाठ्यपुस्तक के उप-भेदों के नाम और संख्या को अंतिम मानें।

टूल आज़माएँ

हिंदी ग्रामर चेकर (व्याकरण जाँच)
हिंदी, अंग्रेज़ी और दूसरी भाषाओं में व्याकरण, वर्तनी और विराम चिह्न सुधारें — हर बदलाव हाइलाइट होता है।
टूल खोलें
हिंदी स्पेल चेकर (वर्तनी जाँच)
हिंदी पाठ में शब्द-सूची (hi_IN) से अनजाने टाइपो और आम अमानक वर्तनी पकड़ें, सुझाव के साथ — जाँच आपके ब्राउज़र में होती है।
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हिंदी शब्दकोश और शब्द जाँच
देखें कि कोई शब्द वर्तनी की शब्द-सूची (hi_IN) में है या नहीं — सुझावों के साथ, और विक्षनरी से अर्थ मिले तो वह भी।
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पर्यायवाची शब्द (Synonyms & Thesaurus)
हिंदी, अंग्रेज़ी और दूसरी भाषाओं के शब्दों के पर्यायवाची और मिलते-जुलते शब्द खोजें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदी में शब्द-भेद कितने होते हैं?

सबसे प्रचलित वर्गीकरण में आठ भेद हैं: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया (विकारी) तथा क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक (अविकारी)। कुछ पुस्तकें निपात जैसे और भेद जोड़ती हैं, इसलिए अपनी पाठ्यपुस्तक का वर्गीकरण देख लें।

विकारी और अविकारी शब्द में क्या अंतर है?

विकारी शब्द वाक्य में लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार रूप बदलते हैं, जैसे लड़का-लड़के, अच्छा-अच्छी, जाता-जाती। अविकारी शब्द हर स्थिति में एक-से रहते हैं, जैसे और, धीरे, के पास, वाह। इन्हें अव्यय भी कहते हैं।

क्या हिंदी में अंग्रेज़ी जैसे आठ parts of speech होते हैं?

संख्या संयोग से आठ है, पर वर्ग अलग हैं। हिंदी में आधार रूप-परिवर्तन है। अंग्रेज़ी के article की जगह कोई अलग भेद नहीं, और preposition का काम परसर्ग तथा संबंधबोधक मिलकर करते हैं। इसलिए एक भाषा का वर्गीकरण दूसरी पर सीधे नहीं बैठता।

किसी शब्द का भेद वाक्य से कैसे पहचानें?

देखें कि शब्द वाक्य में क्या काम कर रहा है: नाम बता रहा है, संज्ञा की जगह आ रहा है, विशेषता बता रहा है, काम दिखा रहा है या शब्दों को जोड़ रहा है। "ऊपर देखो" में ऊपर क्रियाविशेषण है, "छत के ऊपर" में संबंधबोधक। इसलिए केवल शब्द से नहीं, वाक्य से तय करें।

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